नई दिल्ली: 17 साल की नैना भारत की सबसे युवा ट्रांसजेडर हैं। पहली बार किसी ने समाज के सामने इस तरह से बेबाक अंदाज में स्वीकार किया है कि हां वह एक ट्रांसजेंडर हैं।
एक इंटरव्यू में नैना ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उसके अब तक जीवन में अपने जेंडर को लेकर काफी कठनाईयो का सामना करना पढ़ा हैं। जहा लोग मुझे नेचुरल नहीं मानते थे तब मै उन्हे कहती थी कि मैं अन-नेचुरल नहीं हूं।
नैना जो कभी कृष्णा थी
नैना का जन्म लड़के के रूप में हुआ था। उसका नाम कृष्णा रखा गया था पर धीरे-धीरे उन्हे अलग लिंग एहसास हुआ। उन्हे बचपन से ही लड़कियों के कपड़े पहना पसंद था और ज्यादातर वह लड़कियों के साथ ही घूमता फिरता था।
मां को सबसे पहले पता चला
पहले नैना के घरवालों को इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ था कि वह लड़की है लेकिन नैना की मां को उन पर शक तब हुआ जब वह बाजार मे लड़को के टॉयज की बजाय सॉफ्ट टॉयज पसंद करती देखती थी, तब उन्हे लगता था कि उनका बेटा गे है पर बाद में उन्होंने यह बात मान ली की उनका बेटा एक लड़की है। जो किसी भी मां के लिए यह मानना आसान नही है।
समाज ने नेगेटिक कमेंट दिए लेकिन मां ने हिम्मत दी
वह बताती है कि उनकी जिंदगी में उनकी मां की भूमिका बेहद अहम रही है। जब समाज से उन्हे काफी नेगेटिव कमेंट मिले, उसके बाद वो गहरे मानसिक तनाव से गुजरी। उन्होने मां होने की अलग ही परिभाषा दिखाई।
उन्होंने नैना को उसी तरह स्वीकार किया जैसी वो है। मिशी ने नैना को मेंटल ट्रॉमा से मुक्त कराया। मां की वजह से नैना खुद को स्ट्रांग और आत्मविश्वासी मानती है, उनकी मां ने ही नैना को लड़कियों की पहली ड्रेस गिफ्ट की और साथ ही मेकअप करना सिखाया।
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