नई दिल्ली: उत्तराखंड में लागू राष्ट्रपति शासन पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जजों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर कोई समीक्षा के दायरे में आता है और राष्ट्रपति से भी गलतियां हो सकती हैं।
हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद उत्तराखंड में लगा राष्ट्रपति शासन:
उत्तराखंड में सियासी उठापटक का दौर 18 मार्च से ही शुरु हो गया था। राज्य सरकार ने विधानसभा में बजट पेश किया, इसके दौरान ही क्रास वोटिंग हुई और प्रस्ताव विफल हो गया। फिर भी विधानसभा अध्यक्ष ने इसे पास कर दिया। इस पर विधायक हरीश रावत ने मोर्चा खोल दिया। विनियोग विधेयक पर विपक्ष ने मत विभाजन की मांग रखी जिसे नहीं माना गया। इस पर करीब 35 विधायकों ने सरकार के सामने अपना असंतोष जाहिर किया। इस सारे ड्रामे के बीच हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका मिला। लेकिन इसी बीच एक स्टिंग सामने आ गया और रावत से यह मौका छिन गया। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी।
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