सतारा : महाराष्ट्र का सतारा ज़िला जहां कई लड़कियां अपने नाम के कारण ज़िंदगी भर दंश झेलती हैं और वह भी इसलिए कि उनका नाम उनको जिंदगी भर यह अहसास दिलाता है कि आपकी इस दुनिया में कोई ज़रूरत नहीं और वह नाम है नकुशा। यह किसी एक की कहानी नहीं बल्कि महाराष्ट्र में ऐसी कई लड़कियां है जिनको यह नाम एक खास अंधविश्वास के तहत उनके अपने घर वाले रखते हैं, कहा जाता है कि इस नाम के सहारे भगवान को संदेश भेजा जाता है कि अब परिवार को और लड़कियां नहीं चाहिए और लोगों का मानना है कि भगवान उनकी सुनता है।
मुंबई के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिटिकल साइंस के टीवी शेखर और आईआईटी हैदराबाद के वीपी शिजीथ ने इन लड़कियों पर एक शोध किया है जो बताता है कि नकुसा नाम की लड़कियां खुश नहीं है, और स्कूल में भी अपने नाम के चलते मज़ाक का केंद्र बनती है।
आप इस बात को पढ़कर हैरान होंगे लेकिन 21 वीं सदी में प्रगति के हाइवे पर दौड़ रहे हिंदुस्तान में सतारा जैसे कुछ जिलों की यह कड़वी हकीकत है जहां अंधविश्वांस और लड़के की चाहत के नाम पर कई नकुशा ज़िंदगी भर अपमान का दंश झेलती है।
नामकरण ढोल-ताशे के साथ नहीं ग़मगीन माहौल में होता है
नकुशा नाम किसी नामकरण समारोह में नहीं रखा जाता और न ही ऐसे मौक़े पर ढोल-ताशे बजते हैं। बल्कि घर का माहौल ग़मगीन रहता है और जिस लड़की का ये नाम रख दिया जाता है वह सारी ज़िंदगी एक तरह से अपमानित होकर जीती है।
नकुशा आख़िर इस नाम का मतलब क्या है ?
नकुशा का मतलब होता है ''इसकी कोई ज़रुरत नही है'। महाराष्ट्र के इन हिस्सों में ऐसी मान्यता है कि अगर एक या दो लड़की होने के बाद फिर लड़की पैदा हो जाए तो उसका नाम नकुशा रख देना चाहिये। ये नाम रखने के बाद घर में फिर लड़का ही पैदा होगा।
नकुशा के पीछे है अंधविश्वास
नकुशा नाम रखने के पीछे बहुत ही दिलचस्प लेकिन मासूमियत से भरी कहानी है जिसे हम अंधविश्वास कह सकते हैं। इन इलाक़ों के लोगों का मानना है दूसरी या तीसरी लड़की का नाम नकुशा रखने से भगवान को संदेश मिल जाता है कि अब इस परिवार को लड़की नहीं लड़के की ज़रुरत है।
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