नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में अल्पसंख्यक आयोग के बर्खास्त प्रमुख सुखदेव सिंह नामधारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है जो 2012 के गोलीबारी मामले में यहां 20 अन्य लोगों के साथ हत्या के मुकदमे का सामना कर रहे हैं। गोलीबारी में शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा और उनका छोटा भाई हरदीप मारा गया था।
न्यायमूर्ति पी. एस. तेजी ने कहा, नियमित जमानत के लिए आपकी याचिका खारिज की जाती है। आरोपी नामधारी फिलहाल पिछले वर्ष 27 नवम्बर से अंतरिम जमानत पर हैं।
उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय पर भी सवाल उठाए जिसमें उसी अदालत द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के बावजूद उसे अंतरिम जमानत दी गई। नामधारी ने इस आधार पर नियमित जमानत की मांग की थी कि जांच एजेंसी को उसकी और जरूरत नहीं है और खूंखार अपराधियों के साथ जेल में उसे रखे जाने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
पुलिस ने यह कहते हुए उसके आवेदन का विरोध किया था कि वह मुख्य आरोपी है जिसने षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। पोंटी और हरदीप के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा था और 17 नवम्बर 2012 को छत्तरपुर में फार्महाउस में गोलीबारी में दोनों मारे गए थे। इसके बाद नामधारी को 23 नवम्बर 2012 को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में शेष आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
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