गठन के साथ भारी विरोध का सामना कर रही महिला अखाड़ा परी की मुखिया त्रिकाल भवंता ने अखाड़े के घोषणापत्र के मुताबिक आदिशक्ति वेदमाता गायत्री को अखाड़े की देवी और भगवान दत्तात्रेय को अखाड़े का आचार्य घोषित किया।
शैव संप्रदाय के 10 अखाड़ों में सिर्फ दो अखाड़ों में महिलाओं का प्रवेश होता था। जूना और निरंजनी अखाड़े में महिला महामंडलेश्वर भी बनाई गई है। शैव संप्रदाय के अन्य अखाड़ों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित था।
जूना अखाड़े की महिलाओं ने अलग होकर परी अखाड़ा बना लिया। इलाहाबाद के अरैल में परी संप्रदाय ने आश्रम भी बनाया है। अखाड़े में उन्हीं महिलाओं को शामिल किया जाता है जिन्होंने पूरी तरह से संन्यास धारण कर लिया हो।
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