पिथौरागढ़: पडोसी मित्र राष्ट्र नेपाल में भारत के खिलाफ पोस्टरों और रैलियों के ज़रिये ज़हर उगल कर विरोध किया जा रहा है। यह विरोध उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की सीमा से लगे नेपाल में नेपाली कम्युनिस्ट माओवादी पार्टी के छात्र संघठन अखिल क्रांतिकारी विद्यार्थीयों के द्वारा किया जा रहा है।
यह नेपाली छात्र संघठन कालापानी से लेकर लिपुलेख सीमा तक भारत के भूभाग को अपना बताते हुए विरोध कर रहे है, साथ ही नेपाली में लिखे पोस्टर भी नेपाल सीमा में चिस्पा गए है। इस छात्र संघठन ने एक रैली और सभा कर यह चेतावनी भी दी है कि वो दार्चुला से कालापानी तक कूच करेंगे। इस रैली में भारत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। नेपाली बामपंथी छात्रों की इस हरकत से भारतीय सुरक्षा एजेंसिया सतर्क हो गई है।
सीमान्त नेपाल में नेपाली में लिखे पोस्टरों में कालापानी ह्म्रो हो, लिपुलेख ह्म्रो हो जैसे नारे लिखे है यानी कालापानी और लिपुलेख हमारा है। नेपाली छात्रों की भारत विरोधी इस नापाक हरकत के साथ उन्होंने कालापानी कूच का अभियान भी छेड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला!
क्या है कालापानी का मामला! दरअसल नेपाल में मौजूद भारत विरोधी संगठन पहले भी कालापानी पर अपना हक जताता रहा है। इस संगठनों का कहना है कि कालापानी भारत का नहीं बल्कि नेपाल का हिस्सा है। लेकिन 1816 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और नेपाली महाराजा के बीच हुई सुगौली संधि के मुताबिक भारत और नेपाल के बीच काली नदी दोनों देशों का सीमांकन करती है। कालापानी वह जगह है जहां से बहने वाली धारा का नाम काली नदी है। जो उत्तराखंड के चम्पावत ज़िले के पंचेश्वर में पहुंचकर शारदा नदी में बदल जाती है। नेपाल के कुछ संगठनों का कहना है कि काली नदी का उदगम स्थल काला पानी नहीं है बल्कि उसका उदगम लिमिपयाधूरा से निकलनेवाली कुटि नदी है। लिहाजा कुटि नदी का जो भाग जो नेपाल की ओर आता है वह नेपाल का है।
जबकि भारत सरकार का तर्क है कि काली नदी का उदगम लिपुलेख दर्रे के लिपु गाड होता है, इस लिहाज से लिपु गाड तक का सारा इलाका भारत का है। इसका प्रमाण सुगौली संधि के मानचित्र में भी प्रमाणित होता है। कुटि नदी और लिपु गाड के बीच करीब 35 वर्ग किमी का इलाका है, जिस पर नेपाल अपना हक जताता है। मगर पुख्ता दस्तावेजों के मुताबिक यह इलाका भारत का है। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि नेपाल की माओवादी पार्टी इस मुद्दे को हवा दे रही है,किन्तु नेपाल सरकार ने अभी तक भारत के खिलाफ विरोध कर रहे संघठनो के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है। जबकि नेपाल स्वास्थ,शिक्षा सहित अनेक मामलो में भारत पर ही निर्भर है।
भारत-नेपाल सीमा पर कड़ी सुरक्षा-
भारत नेपाल सीमा पर आईटीबीपी, एसएसबी और उत्तराखंड पुलिस को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी सुशील कुमार शर्मा का कहना है कि यदि नेपाल के किसी संघठन ने सीमा में कोई नापाक हरकत की तो उससे निबट लिया जायेगा। बहरहाल जो भी हो नेपाली वामपंथी छात्र संगठन के विरोध को नहीं रोका गया तो दोनों मित्र राष्ट्रों के रिश्तो में खटास आ सकती है।
Latest India News