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बंगाल के आश्रम में केके भंडारी के नाम से रहते थे नेताजी?

नेताजी सुभाषचंद्र बोस को लेकर एक और खुलासा हुआ है। नेताजी को बंगाल के एक आश्रम में नाम बदलकर रहना प़ड़ा था। इसका पता 27 मई को सार्वजनिक की गई फाइलों से चलता है।

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नई दिल्ली: नेताजी सुभाषचंद्र बोस को लेकर एक और खुलासा हुआ है। नेताजी को बंगाल के एक आश्रम में नाम बदलकर रहना प़ड़ा था। इसका पता 27 मई को सार्वजनिक की गई फाइलों से चलता है। नेताजी 1963 में उतर बंगाल के शालुमरी आश्रम में के के भंडारी के नाम से रहते थे। फाइलों से यह भी ज्ञात होता है कि तब टॉप लेवल के अधिकारियों ने भंडारी के नाम पर चर्चा भी की थी।

नेताजी से जुड़ीं सार्वजनिक हुईं कई फाइलों में केके भंडारी को ही सुभाष चंद्र बोस कहा गया है। यह पूरा मामला शालुमरी आश्रम के सचि‍व रमानी रंजन दास के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लिखे पत्र से शुरू होता है। दास ने सुभाष चंद्र बोस के संबंध में 1963 में पत्र लिखा था। इसके बाद पीएम नेहरू के निजी सचिव के. राम की ओर से इंटेलीजेंस ब्यूरो के तत्कालीन सचिव बीएन मलिक को सौंपे गए टॉप सीक्रेट में में इसका जिक्र है। 23 मई को मेमो सौंपा गया। उसके बाद मलिक 12 जून 1963 को भंडारी के मेमो का जवाब देते हैं।

इसी साल 7 सितंबर को पीएमओ के एक टॉप सीक्रेट मेमो में भंडारी का जिक्र किया जाता है। 11 नवंबर 1963 को मलिक पीएमओ को एक और पत्र लिखते हैं। 16 नवंबर को इंटेलीजेंस ब्यूरो जवाब के रूप में पीएमओ को एक नोट भेजता है।

नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए बनाए गए मुखर्जी कमीशन ने इस बात को नहीं माना था कि भंडारी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे। दरअसल मुखर्जी आयोग के दबाव के बाद पीएमओ ने साल 2000 में भंडारी के मुद्दे से जुड़ी फाइलें मुखर्जी कमीशन को सौंपी। मुखर्जी कमीशन ने साफ किया था कि भंडारी नेताजी नहीं थे। इसके बावजूद कई लोगों का यह मानना था कि वो नेताजी ही थे।

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