नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कहा कि कावेरी नदी के पानी बंटवारे के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद कर्नाटक और तमिलनाडु में हुए उपद्रवों के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तमाशबीन बने रहे और करोड़ों रूपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और हिंसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आयोग ने इस सिलसिले में दोनों राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी किया।
आयोग ने कहा कि न्यायालय के आदेश के मद्देनजर अधिकारियों को हालात से निपटने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए था। आयोग ने यह भी कहा कि पुलिस और सिविल अधिकारियों ने कदम तभी उठाए जब बड़े पैमाने पर हिंसा हो चुकी थी और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा चुका था।
दोनों राज्य सरकारों से 4 हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
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