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‘इशरत जहां मामले में PM और अमित शाह को बदनाम करने की कोशिश हुई’

नितिन गडकरी ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमे कहा गया था कि एनआईए ने मालेगांव बम धमाकों में साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट भाजपा नीत एनडीए सरकार के दबाव में दी थी।

Nitin Gadkari

संवाद के दौरान अमित शाह से पूछा गया कि पीएम मोदी दादरी जैसे मामलों पर चुप क्यों रहते हैं, इस पर जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि पीएम के लिए यह जरूरी नहीं है कि वो हर मुद्दे पर बोलें। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बीफ खाने के कारण किसी की हत्या करना गलत है इसीलिए कोई भी इसका समर्थन नहीं करता है।

गडकरी ने कहा, “इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना भारत में पहली बार नहीं हुई है। कांग्रेस के कार्यकाल में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। हाल ही में बिहार में एक पत्रकार की हत्या हुई। अगर ऐसी घटना भाजपा शासित किसी गांव में हुई होती तो मीडिया चैनलों का मिजाज कुछ बदल गया होता। चीजें जो गलत हैं वो हमेशा गलत रहती हैं और दुर्भाग्यपूर्ण। बीफ के लिए किसी को मारना गलत है इसीलिए कोई भी इसका समर्थन नहीं करता है। अरुण जेटली इस सरकार के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने इसकी निंदा की। मैं भी इस मुद्दें पर बोल चुका हूं। अब आप कह रहे हैं कि मोदी जी क्यों नहीं बोले। पीएम मोदी का हर मुद्दे पर बोलना जरूरी नहीं है।”

बीते दो सालों में सड़क परिवहन और जलपोत क्षेत्र में मिली उपलब्धियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यूपीए की तुलना में एनडीए की सरकार आने के बाद नेशनल हाईवे बनाने के काम में तेजी आई है। गडकरी ने कहा, “जब मैं मंत्री बना तब नेशनव हाइवे बनने की रफ्तार 2 किलोमीटर प्रतिदिन थी, जबकि अब इसकी रफ्तार 20 किलोमीटर प्रतिदिन है। 26 मई तक यह रफ्तार 30 किलोमीटर प्रतिदिन हो जाएगी।”

गडकरी ने कहा कि हमने 60 हजार करोड़ का काम खत्म कर दिया है। पहली बार भारत के इतिहास में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे सभी बंदरगाह फायदे में हैं, हमें छह हजार करोड़ का फायदा हुआ है। हमने बंदरगाह क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर 25 लाख करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है, जिसमे से सिर्फ सागर माला प्रोजेक्ट में ही 12 लाख करोड़ रुपए निवेश किए जाने हैं। बंदरगाहों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए 4 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसके साथ ही बंदरगाहों के विकास हेतु 27 इंडस्ट्रियल क्लस्टर के लिए 8 लाख करोड़ रुपए लक्षित किए गए हैं।  

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