नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2015 के एग्जिट पोल में 5 टीवी चैनलों ने अपनी सहयोगी एजेंसी के साथ किए सर्वे में जहां महागठबंधन को बढ़त दिखाते हुए एनडीए से कड़े मुकाबले का संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ न्यूज 24 और टुडेज चाणक्य के एग्जिट पोल में एनडीए को 155 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। महागठबंधन के हिस्से 83 सीटें आ सकती हैं।
टुडेज चाणक्य के अनुसार इन सीटों में 15 सीटों का प्लस माइनस होने की संभावना हो सकती है। चाणक्य टुडेज का एग्जिट पोल इसलिए रोचक हो जाता है क्योंकि इसका पिछले दो लोकसभा चुनाव में सटीक एग्जिट पोल रहा था जो अंतिम चुनाव परिणाम के बेहद करीब था। साथ ही कई स्टेट इलेक्शन और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भी टुडेज चाणक्य का अनुमान सही निकला था।
दिल्ली चुनाव 2015 में भी आम आदमी पार्टी को टुडेज चाणक्य ने अधिक सीटें जीतने का दावा किया था। टुडेज चाणक्य के शानदार रिकॉर्ड को देखते हुए बिहार चुनाव को लेकर उसके एग्जिट पोल के बाद बिहार विधानसभा चुनाव में जनादेश किसे मिलेगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
एक तरफ जहां सात में से पांच ने बिहार में महागठबंधन को बढ़त दिखाई है वहीं टुडेज चाणक्य ने बिहार में एनडीए गठबंधन की जबरदस्त जीत का दावा करते हुए 155 सीटें जीतने का दावा किया है। टुडेज चाणक्य के अनुसार नीतीश और लालू का महागठबंधन 83 सीटें जीत सकता है और अन्य दल 5 सीटें जीत सकते हैं।
भाजपा को 46 फीसदी और महागठबंधन को 39 फीसदी वोट
टुडेज चाणक्य के अनुसार एनडीए को जनता का भारी समर्थन मिलता दिख रहा है और उसे 46 फीसदी वोट मिलने की संभावना है वहीं महागठबंधन को 39 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। 15 फीसदी ऐसे मतदाता रहे हैं जिन्होंने अन्य दलों के पक्ष में अपना समर्थन दिया है।
टुडेज चाणक्य के अनुसार 7 फीसदी वोटों के अंतर के साथ एनडीए गठंबंधन भारी जीत दर्ज करते हुए 155 सीटें जीत सकता है। इसमें 15 सीटों का प्लस माइनस हो सकता है।
| एग्जिट पोल |
एनडीए |
महागठबंधन |
| न्यूज-24 / चाणक्य |
155 |
83 |
| आज तक / सिसेरो |
113-127 |
111-123 |
| एबीपी / नील्सन |
108 |
130 |
| इंडिया टीवी / सी वोटर्स |
101-121 |
112-132 |
चुनाव में रोचक था मुकाबला-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोकने के लिए बिहार में सारे विरोधी एक हो लिए। यानी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और कांग्रेस ने मिलकर महागठबंधन बनाया जो इस बार के चुनाव में रालोसपा, लोजपा, हम और भाजपा के सहयोग वाली एनडीए से था। वहीं मुलायम सिंह यादव ने भी तीसरे मोर्चे के साथ चुनाव में ताल ठोकने की कोशिश की। ओवैसी ने भी इस चुनाव में शामिल होकर वोट बैंक काटने की भरसक कोशिश की।
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