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फादर्स डे स्पेशल: मेरे पापा मेरे लिए सुपर हीरो

नईदिल्ली: मेरे पापा ने impossible शब्द को i m possible शब्द में बदल दिया। यह कहना है रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सोहन रॉय की बेटी तृषा रॉय का । जो अपने पापा को अपना रोल मॉडल

रॉय की बेटी तृषा रॉय बताती है कि फ़ौज के कड़े अनुशासन के बावजूद एक इच्छा थी जो कहीं न कहीं उनके अन्दर हिलोरे मार रही थी वो थी “बाइकिंग”। एक बेहद अच्छे पिता होने की वजह से मैं कहूंगी कि उनके भीतर एक ऐसी आत्मा है जो कहती है कि मैं कभी नहीं मरूंगा।

हालांकि पापा की बाइकिंग करने में समस्या आई।  घुटने की एक बड़ी चोट को बाद में उनके लिए ऑस्थराइटिस की वजह बन गई, भी उनको पीछे हटने पर मजबूर नहीं कर सकी और उनके कभी हार न मानने के रवैये के चलते उन्होंने महज़ एक बार एन्थ्रोस्कोपी कराई।
जब वह 1999 में सेना के अस्पताल में भर्ती हुए तो डॉक्टर ने पूछा कि आप रोज कैसे आया जाया करेंगे? इस पर उनका जवाब था... बाइक से सर। यह सुनकर डॉक्टर हैरान थे।

हालांकि एक समस्या के कारण वह एक छड़ी की मदद से चले और लगभग 12 साल के लिए एक गियरलेस स्कूटर के लिए बस गए। जब सोहन रॉय से अपनी मोटर साइकिल की सवारी को छोड़ने के लिए किया था तो उनके जीवन से दूर जाने के बराबर था। रॉय घुटने
बीमारी को बाइकिंग के अपने जुनून के रास्ते में नहीं आया था ।

अगली स्लाइड में पढ़िए तृषा रॉय के जज्बा  के बारें में..

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