नई दिल्ली: प्रसिद्ध विचारक व शिक्षाविद नॉम चोमस्की और दुनियाभर में लोकप्रिय लेखक ओरहान पामुक सहित 86 विभिन्न शिक्षाविदो नें JNU के मुद्दे पर छात्रों का समर्थन किया है। नॉम चोमस्की नें JNU यूनिवर्सिटी के उप-कुलपति एम. जगदेश कुमार को लिखे एक ई-मेल में पुलिस को यूनिवर्सिटी कैम्पस में आनें देंने के उनके निर्णय की आलोचना की है। चोमस्की नें कहा कि 'जो लोग इसमें शामिल में हैं वो दमनकारी औपनिवेशिक काल और 1970 के दशक के आपातकाल के काले दिनों की पुनरावृत्ति कर रहें हैं।'
चोमस्की नें लिखा कि, हम सभी लोग JNU विवाद पर चिंतित हैं जिसमें पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन नें बिना किसी सबूतों के कार्यवाही की।
अपनें बचाव में जगदेश कुमार नें कहा कि, उन्होंनें पुलिस को नहीं बुलाया ब्लकि हम तो कानून का सहयोग कर रहे थे।
शिक्षाविदों नें एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा कि जिस प्रकार पुलिस नें यूनिवर्सिटी कैम्पस में घुसकर एक छात्र नेता, कन्हैया कुमार को विद्रोहात्मक आचरण व हिंसा भड़कानें के आरोप में बिना सबूतों के गिरफ्तार किया उससे औपनिवेशिक काल की यादें ताजा हो गयीं।
छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को 12 फरवरी को यूनिवर्सिटी कैम्पस में देश विरोधी नारे लगानें व संसद भवन पर हमला करनें वाले आतंकी अफजल गुरु के समर्थन में नारें लगानें के आरोपो में गिरफ्तार किया गया था।
यूनिवर्सिटी नें भी एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर इस मामले की जांच शुरु कर दी है जो 25 फरवरी को अपनी अन्तिम रिपोर्ट देगी तब तक कन्हैया कुमार व सात अन्य आरोपी शैक्षिणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिये गये हैं।
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