इंफालः मणिपुर में शुक्रवार सुबह शुरू हुए 38 घंटों के बंद से राज्य के लोगों के सामान्य जनजीवन पर काफी असर पड़ा है। मणिपुर विधानसभा द्वारा पारित प्रवासी विरोधी तीन विधेयकों पर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए दबाव बनाने के तहत बंद का आह्वान किया गया है।
इससे पहले, इन्हीं तीनों विधेयकों को 'जनजाति विरोधी' करार देते हुए राज्य के पर्वतीय जिलों में 48 घंटे की हड़ताल की गई थी। इसके अलावा पिछले महीने थोबल जिले के नुंगेई में गोलीबारी कर 14 लोगों को घायल करने के आरोपी तीन मुसलमानों को गिरफ्तार करने में पुलिस की नाकामी के विरोध में रविवार आधी रात से 24 घंटों का 'जनता कर्फ्यू' लगेगा।
शुक्रवार को सड़कें वीरान रहीं तथा बाजार व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहे। इनर लाइन परमिट सिस्टम की ज्वाइंट कमेटी की छात्र शाखा ने बंद की नोटिस के बावजूद सेमेस्टर परीक्षाएं कराने के लिए मणिपुर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की आलोचना की।
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छात्र शाखा के एक नेता ने कहा, "कई छात्र परीक्षा नहीं दे पाए, इसलिए परीक्षा दोबारा होनी चाहिए। यदि छात्रों को परीक्षा से महरूम किया गया, तो इसकी जवाबदेही अधिकारियों की होगी।" एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, "विधेयक को लागू करने तथा बाहरी लोगों का मताधिकार खत्म करने की मांग को लेकर रात में मशाल जुलूस निकाला जाएगा।"
उप मुख्यमंत्री गईखंगम के नेतृत्व में राजनीतिज्ञों ने मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी को ज्ञापन का मसौदा सौंप दिया है। यह ज्ञापन राजनीतिज्ञों के प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित दिल्ली दौरे के दौरान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व अन्य को सौंपा जाएगा। अधिकारियों ने कहा, "मुख्यमंत्री इसे पहले ही मंजूरी दे चुके हैं, बाद में कैबिनेट भी इसे मंजूरी दे देगी।"
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