नई दिल्ली: भारत ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान लगातार तीसरी बार अपनी परमाणु मिसाइलों का प्रदर्शन नहीं किया। भारत ने 2013 में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान अपने अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि पांच का प्रदर्शन किया था।
उस वक्त मुख्य अतिथि भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक थे। लेकिन जब 2014 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे मुख्य अतिथि के तौर पर आए तो बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन नहीं किया गया।
भारत उस वक्त जापान के साथ असैन्य परमाणु समझौता करने की प्रक्रिया में था। जापान एकमात्र ऐसा देश है जिसने परमाणु बम हमले का दंश झेला है। पिछले वर्ष भी परमाणु मिसाइलों का प्रदर्शन नहीं हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के रूप में आए थे।
यह पूछने पर कि बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन क्यों नहीं किया जा रहा है तो भारतीय सेना के दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल राजेश सहाय ने कहा कि हमें हर प्रतिरोधक क्षमता को दिखाने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने हाल ही में संवाददाताओं से कहा था, कुछ प्लेटफॉर्म खुले क्षेत्र में है जिसे दिखाए जाने की जरूरत नहीं है। कुछ ऐसे सामान हैं जिन्हें हर बार नहीं दिखाया जाता।
बहरहाल उन्होंने कहा कि कुछ चीजें अगले वर्ष प्रदर्शित की जा सकती हैं जिन्हें क्रमवार तरीके से किया जाता है।
मेक इन इंडिया पहल की बात करने वाली सेना ने डीआरडीओ द्वारा विकसित अर्जुन टैंक के बजाए रूस के टैंक टी 90 का प्रदर्शन किया। सेना ने इन्फैंटरी कम्बैट व्हिकल बीएमपी टू, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के मोबाइल ऑटोनॉमस लांचर, आकाश आयुध प्रणाली, स्मर्क प्रक्षेपण यान और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का प्रदर्शन किया।
नौसेना ने मेड इन इंडिया टैग के साथ अपने विमानवाही पोत विक्रांत में उडानों के लिये बनाये गये क्षेत्र और मझगांव गोदी में बनी पनडुब्बी कालवेरी का प्रदर्शन किया।
वायुसेना ने पांच फ्रेंच जगुआर का प्रदर्शन भी किया।
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