लखनऊ: अपनी 13 साल की बेटी आरुषि की हत्या के जुर्म में जेल की सजा काट रहीं नूपुर तलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को तीन हफ्ते की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। नूपुर तलवार को अपनी बीमार मां को देखने जाने के लिए यह पैरोल मिली है। वर्ष 2008 में नोएडा के जलवायु विहार स्थित आवास में आरुषि की हत्या कर दी गई थी और घर से ही उसका शव बरामद किया गया था। यह हत्याकांड दशक के सर्वाधिक सनसनीखेज मामलों में से एक था और इससे प्रेरित होकर किताबें लिखी गईं और फिल्में बनीं।
शुरू में पुलिस को हत्यारे के रूप में तलवार परिवार के घर में काम करने वाले नौकर हेमराज पर संदेह हुआ था लेकिन वह भी दूसरे दिन उस फ्लैट की छत पर मृत मिला था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाद में नूपुर एवं उनके दंत चिकित्सक पति राजेश तलवार को दोषी माना था। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने वर्ष 2010 के दिसंबर में गाजियाबाद की विशेष अदालत से कहा था कि उसके पास तलवार दंपति के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और वह मामला खत्म करना चाहती है।
हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद इस दंपति को अपनी इकलौती बच्ची की हत्या का दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई। तलवार दंपति अपने को बेगुनाह बताते रहे। यह मामला आज भी बहुत सारे लोगों के लिए रहस्यमय बना हुआ है।
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