चंडीगढ़: हरियाणा में फरवरी में हुए जाट आंदोलन के दौरान हुई हिसा की जांच के लिए बनी प्रकाश सिंह समिति ने पुलिस और प्रशासन के कुछ अधिकारियों को ढिलाई बरतने का जिम्मेदार ठहराया है। उत्तर प्रदेश और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह के नेतृत्व में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को शुक्रवार को सौंप दी।
हरियाणा सरकार के सूत्रों ने बताया कि इसमें कम से कम 30 अधिकारियों को 'अपर्याप्त कार्रवाई' को लेकर दोषी ठहराया गया है। प्रदेश के 10 जिलों में 7 फरवरी से 22 तक फरवरी तक हुए जाट आन्दोलन में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी और जनजीवन थम गया था।
खट्टर ने समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद कहा कि सरकार इसका अध्ययन कर उचित कदम उठाएगी। जाट आन्दोलन के दौरान सड़कें जाम कर दी गई थीं, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल थे। साथ ही कई जिलों में सरकारी और निजी संपत्तियों को बहुत बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया था।
इस आन्दोलन के दौरान कम से कम 30 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर युवा थे। 320 लोग घायल हुए थे। इस दौरान सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस रिपोर्ट में हिंसा प्रभावित रोहतक, झज्जर, जींद, हिसार, कैथल, भिवानी, सोनीपत और पानीपत के अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई। प्रवक्ता ने बताया, "जिन अधिकारियों ने अपने काम में कोताही बरती और आंदोलनकारियों के प्रति नरम रूख अपनाया, उनकी पहचान कर ली गई है।"
Latest India News