नई दिल्ली: जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में विपक्षी विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। उमर ने इस मुलाकात के बाद कहा कि हिंसाग्रस्त राज्य राजनीतिक समस्या से जूझ रहा है, जिससे प्रशासनिक तरीके से नहीं निपटा जा सकता। उमर ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कहा, "जम्मू एवं कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है। इससे प्रशासनिक तरीके से नहीं निपटा जा सकता।"
नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता ने कहा कि आठ जुलाई को बुरहान वानी के मारे जाने के बाद 'हमारी अपनी गलतियों के कारण' स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई है। इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने उमर के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें घाटी की स्थिति से अवगत कराया, जहां पिछले 43 दिनों से कर्फ्यू जारी है। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा।
उमर ने कहा, "पाकिस्तान पिछले 25 सालों से घाटी में शांति भंग करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर आप मुझसे पूछें कि वानी के मारे जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति क्या पाकिस्तान के कारण है, तो मैं कहूंगा 'नहीं'।" उमर ने कहा पाकिस्तान ने निश्चित तौर पर स्थिति को भड़काने की कोशिश की है और कुछ हद तक उसमें सफल भी हुआ है। उमर ने कहा, "लेकिन तात्कालिक तनाव का कारण हमारी अपनी गलतियां हैं।" उमर ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि जो पहल सरकार को करनी चाहिए थी, वह विपक्ष कर रहा है।
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