राजा महाबली उस समय अपने इष्ट की पूजा में तल्लीन था। जब आँखें खोलीं तो सामने एक बटुक खड़ा था। राजा ने पूछा बोलो बालक क्या चाहिए। बटुक (वामन रूप में विष्णु) ने कहा मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए। राजा महाबली को हंसकर बोले ले लो। वास्तविकता यह है कि महाबली को भी आभास हो चला था कि स्वयं उसके इष्ट देव उसे मोक्ष देने आ गए हैं। विष्णु जी ने अपना विराट रूप (त्रिविक्रम) धारण कर लिया। एक ही पग में पूरी धरती समां गयी, दूसरे में आकाश अब तीसरे पग को रखने के लिए कोई जगह शेष नहीं बची तब महाबली ने नतमस्तक होते हुए अपना सर बढ़ा दिया ताकि प्रभु के चरण उसपर पड़ें, फिर प्रभु ने चरण महाबली के शीश पर रखे और इसके साथ ही वह पाताल लोक में पहुँच गया। फिर विष्णु जी ने महाबली को वरदान दिया कि वह प्रति वर्ष एक दिन के लिए अपने प्रिय प्रजा से मिलने पृथ्वी लोक में आ सकेगा। ओणम का उत्सव उसी महाबली के स्वागत में प्रति वर्ष मनाया जाता है जो दस दिनों तक चलता है।
Latest India News