नई दिल्ली: मनमाफ़िक तारीख़ पर, मनमाफ़िक ट्रेन में क्यों नहीं मिलता कन्फर्म टिकट। कौन है रेल टिकट का सौदागर और इन दलालों के आगे कैसे फेल हुए प्रभु के तमाम फॉर्मूले? रिज़र्वेशन के नए नियमों के बावजूद क्यों नहीं रुक रही टिकटों की कालाबाजारी। हमारे चैनल इंडिया टीवी के अंडर कवर रिपोर्टर फ़ारुख नवाज़ी ने जब दिल्ली के पहाड़गंज की पड़ताल की तो आंखें खोलने वाला सच सामने आया।
स्टिंग ‘ऑपरेशन पहाड़गंज’ में दिल्ली के दलालों की दुकान से मनचाही ट्रेन के टिकट का फ़रेब और दिल्ली पुलिस के नाम पर फर्ज़ी FIR का खेल है। कैसे बगैर किसी आईडी प्रूफ के आप देश के किसी भी कोने में रेल के रिजर्व टिकट से सफर कर सकते हैं। क्या है दलालों का नया तिकड़म जिसके सामने रेलवे रिज़र्वेशन के नियम-कायदे बेमानी हो रहे हैं।
कन्फर्म रेल टिकट का सबसे नया फ्रॉड
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने पहाड़गंज नाम का इलाका है। इस इलाके में होटल, टूर एंड ट्रेवल के अलावा खाने पीने की दुकाने हैं। इसी इलाके में टूर एंड ट्रेवल की कई दुकानों से चलता है रेल टिकट का काला कारोबार। हम जानना चाहते थे कि आखिर रेलवे रिजर्वेशन के नए नियम- जैसे रिर्वेजशन के लिए मुसाफिर का पूरा नाम। तत्काल के लिए अलग-अलग समय और एक आईडी पर टिकटों की संख्या तय हो जाने के बाद आखिर टिकट का काला खेल कैसे चल रहा है।
हम जानना चाहते थे कि क्या नए नियम से दलालों के हौसले पस्त हैं और पहाड़गंज की गलियों में हताशा है। हम जानना चाहते थे कि क्या पहले की तरह अब रेल का मनचाहा टिकट दलालों से लेना मुमकिन नहीं रह गया है। हम देखना चाहते थे कि क्या टिकट के सौदागरों की कमर टूट चुकी है। इन तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए हम पहाड़गंज के एस के टी ट्रैव्ल्स पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात टिकट के काले कारोबार के एक मंझे हुए खिलाड़ी संतोष कुमार से हुई। हमने जाते ही आम ग्राहकों की तरह ही उससे टिकट की फरमाइश कर दी।
मनमाने दाम पर टिकट बेचते हैं दलाल
स्टिंग-
संतोष- कौन सी गाड़ी ?
रिपोर्टर- संपर्क क्रांति
संतोष- कहां जाना है ?
रिपोर्टर- सिवान
संतोष- कब जाना है कल ?
रिपोर्टर- आज
संतोष- आज... आज तो ट्रेन लगी है जानेवाली
रिपोर्टर- अभी टाइम है ना
संतोष- घर का राज है क्या ?..जब मन हुआ कोई टिकट उठाकर दे दिया ऐसा नहीं होता जो आप सोच रहे हो
रिपोर्टर- कल का कितना लगेगा ?
संतोष- कल का आपको बनवा देंगे 1300 रूपए लगेगा आपको
सौदा तय होने के बाद हमने दलाल से कहा कि हमारे पास आईडी प्रुफ नहीं है। आईडी ना होने की सूरत में दलाल ने हमे जो आइडिया दिया उसे सुनकर हम हैरान रह गए। आप भी सुनिए मोटी कमाई के लिए टिकट के दलाल कैसे कानून का मजाक उड़ाते हैं और पूरे सरकारी सिस्टम के साथ खिलवाड़ करते हैं।
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