नई दिल्ली: हुर्रियत अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी की शुक्रवार को कश्मीर के त्राल रैली में भारत सरकार के सख्त रुख के बावजूद एक बार फिर से पाकिस्तानी झंडे लहराए गए। इसी के साथ गिलानी ने हिंदुओं की पवित्र अमरनाथ यात्रा पर भी निशाना साधा और यात्रा को 30 दिनों से ज्यादा न होने की बात कहीं।
त्राल में ही पिछले महीने पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में एक युवक की मौत हो गई थी। गिलानी ने जुम्मे की नमाज के बाद रैली की लेकिन उससे पहले मुजफ्फर अहमद वानी के परिवार वालों से मिले थे। आर्मी की कार्रवाई में ही वानी के बेटे खालिद मुजफ्फर की मौत हो गई थी।
रैली को संबोधित करते हुए गिलानी ने कश्मीरी पंडितों की पुर्नवास योजना की आलोचना की।
एक वेबसाईट के मुताबिक पुलिस शुक्रवार सुबह गिलानी को नजरबंद करने पुहंची थी लेकिन तब तक गिलानी ने त्राल के लिए घर छोड़ दिया था। हुर्रियत के करीबी नेताओं ने कहा कि गिलानी सुबह होते ही त्राल पहुंच गए थे। 86 साल के गिलानी ने त्राल में ही जुम्मे की नमाज अदा की। हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर ने कहा कि गिलानी साहब इंडियन आर्मी की तरफ से की जा रही ज्यादती का खुलकर विरोध करेंगे।
गिलानी की रैली में पाकिस्तानी झंडे लहराए जाने पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कड़ी आपत्ति जतायी है। नकवी ने कहा, 'ये अलगाववादी अपने आकाओं को खुश करने के लिए जो हरकतें कर रहे हैं उन्हें निराशा हाथ लगेगी। उन्हें समझ लेने की जरूरत है कि यद देश कभी भी तालिबानी विचारधारा से नहीं हांका जा सकता। यह देश सिर्फ विकास के अजेंडे के साथ चलेगा। इस देश और जम्मू-कश्मीर की जनता शांति, सद्भावना और विकास चाहती है।'
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