जब तिरंगे से लिपटें घर पहुंचे परमवीर
शहीद भोला सिंह की बेटी को पिता के घर लौटने का इंतजार था, पापा घर लौटे तो लेकिन तिरंगे में लिपटे हुए शहादत की एक वीरगाथा के साथ। जिस 6 साल के बेटे ने प्यारे डैडी की ऊंगलियां थाम कर चलना सीखा, उन्हीं हाथों से पापा को आज मुखाग्नि देनी पड़ी।
शहीद की बेटी कहलाने पर गर्व
भारत माता पर आंच आई तो आतंकियों से लोहा लेते हुए राज सिंह राणा भी शहीद हो गए। खून के आखिर कतरे तक लड़ते रहे, हाथ तब रूके जब सांसों ने हौसले का साथ छोड़ दिया। पापा की इसी हिम्मत और जज्बे का नजीता है कि शहीद की बेटी कहलाने पर गर्व है।
परमवीरों के परिवार का दर्द कैसे सुनाएं?
जिगर के टुकड़े को खोने का दर्द क्या होता है,शहीद ओम प्रकाश के घरवालों से बेहतर भला कौन समझेगा। मां के पास आज बोलने के लिए एक शब्द नहीं है। छोटे-छोटे बच्चों के बीच बैठी पत्नी एकदम खामोश है ये खामोशी बहुत कुछ कह रही है। पिता ने हिम्मत जुटाई हुए कहा हम आंसू क्यों बहाए,एक बेटे ने अपनी भारत माता के लिए बलिदान दिया है।
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