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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा RTI के दायरे में न आएं पार्टियां

नई दिल्ली: केंद्र सरकार चाहती है कि पार्टियों से जुड़े अहम कामकाज प्रभावित न हों इसलिए उन्हें आरटीआई (सूचना का अधिकार कानून) के अंतर्गत नहीं आना चाहिए। केंद्र सरकार ने सुप्रीम में एक हलफनामा दाखिल

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केंद्र की SC को दलील RTI में न शामिल हों पार्टियां

नई दिल्ली: केंद्र सरकार चाहती है कि पार्टियों से जुड़े अहम कामकाज प्रभावित न हों इसलिए उन्हें आरटीआई (सूचना का अधिकार कानून) के अंतर्गत नहीं आना चाहिए। केंद्र सरकार ने सुप्रीम में एक हलफनामा दाखिल कर यह अपील की है कि राजनीतिक दलों को सार्वजनिक प्राधिकरण मानते हुए उन्हें आरटीआई के दायरे से बाहर ही रखा जाए। केंद्र सरकार ने अपनी इस दलील के पीछे यह तर्क दिया कि अगर देश की तमाम पार्टियां आरटीआई के दायरे में आईं तो उनके निकटतम प्रतिद्वंदी यानी पार्टियां सार्वजनिक हुईं तमाम जानकारियों का दुरुपयोग कर सकती हैं जो किसी भी लिहाज से उचित नहीं होगा।

केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से दिए गए हलफनामें में लिखा है कि जब आरटीआई अधिनियम देशभर में लागू हुआ था तो उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक दलों को भी कानूनी दायरे के अतंर्गत लाए जाने पर विचार हो सकता है। आपको बता दें कि यह हलफनामा उप सचिव ने दाखिल किया था जिसमें लिखा गया है कि राजनीतिक दलों के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता हेतु राजनीतिक दलों के वित्तीय मामलों में आवश्यक पारदर्शिता के लिए जनप्रतिनिधि कानून (आरपीए),1951 और आयकर अधिनियम में विशिष्ट प्रावधानों का जिक्र है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में यह भी बताया कि इलेक्शन कमीशन ने राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए आरपीए की धारा 29सी के तहत आधिकारिक वेबसाइट खोल रखी है..जहां पर इस तरह की जानकारियां मिलती हैं।

गौरतलब है कि भाजपा, कांग्रेस, वाम दलों समेत सभी राजनीतिक दलों को आरटीआइ के तहत लाने के लिए मांग की गई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक नोटिस देकर जवाब मांगा था।

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