कोलकाता, पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के लगभग सप्ताह भर बाद गुरुवार को फिर से हुए विस्फोट के बाद यहां घबराहट का माहौल है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार की घटना पटाखा बनाने वाली सामग्री में दुर्घटनावश हुए विस्फोट के कारण हुई। हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है।
इससे पहले छह मई को मिदनापुर के पिंगला इलाके में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 12 लोगों की जानें गई थीं। इनमें से नौ नाबालिगों की मौत हुई थी और चार लोग घायल भी हुए थे।
पश्चिमी मिदनापुर की पुलिस अधीक्षक भारती घोष ने आईएएनएस को बताया, "यह कोई बड़ा विस्फोट नहीं बल्कि पटाखों में हुआ विस्फोट था, जिनमें गर्मी के कारण आग लग गई होगी। पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी गई है और 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को यहां 24 घंटे की ड्यूटी पर लगाया गया है। हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है।"
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक दल ने घटनास्थल का मुआयना किया और दावा किया कि विस्फोट जोरदार था और इलाके के लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य भारती मुत्सुद्दी ने कहा, "विस्फोट बेहद जोरदार था और काफी दूर तक इसकी आवाज सुनी गई थी। इलाके के लोग पहले से डरे हुए हैं और अब इस घटना ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है। उनका यह भी कहना है कि पुलिस ने ग्रामीणों की हौसला अफजाई के लिए कोई कदम भी नहीं उठाया है।"
भारती और दूसरे कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से मिलकर बात की और छह मई की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को सहायता राशि और रोजगार दिलाने की मांग भी रखी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मारे गए लोगों में से नौ के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने और घायल चार लोगों को 50-50 हजार सहायता राशि देने की घोषणा की है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार के हुए विस्फोट के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की।
घटना की जांच के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच सौंपने की मांग की गई है, वहीं कांग्रेस सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को खत लिखकर अग्रणी जांच एजेंसी से घटना की जांच कराने की मांग की है।
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