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इस कब्र पर नहीं चढ़ाते फूल, जूतों से करते हैं पिटाई!

नई दिल्ली: मकबरों और दरगाह पर अकसर सभी धर्मों के लोग मन्नतें मांगते हैं। मन्नतें  पूरी हो इसके लिये लोग फूल और चादर चढ़ाकर प्रार्थना करते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा कब्र है

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इस कब्र पर नहीं चढ़ाते फूल, जूतों से करते हैं पिटाई!

नई दिल्ली: मकबरों और दरगाह पर अकसर सभी धर्मों के लोग मन्नतें मांगते हैं। मन्नतें  पूरी हो इसके लिये लोग फूल और चादर चढ़ाकर प्रार्थना करते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा कब्र है जहां पर लोग जूते मारकर अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए प्रार्थना करते हैं।

आइए बताते हैं इस कब्र के पीछे छुपी कहानी को। यह है चुगलखोर का मकबरा। यहां मन्नत पूरी करने के लिए लोग ना तो कोई फूल चढ़ाते हैं, ना कोई अगरबत्ती जलाते हैं बल्कि कब्र के ऊपर जूतों की बरसात करते हैं।

करीब 500 साल पुरानी कब्र पर लोग इस तरह की अनोखी इबादत इटावा-फर्रुखाबाद-बरेली राजमार्ग की यात्रा हिफाजत से गुजर जाने के लिए करते हैं। कहते हैं कि इस मार्ग पर यात्रा के दौरान भूतों का साया होता है। उनसे सुरक्षा के लिए इस पांच सौ साल पुराने मकबरे पर इबादत की जाती है।

इटावा जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर इटावा-बरेली राजमार्ग पर स्थित यह मकबरा जीर्णशीर्ण दशा में है।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार इटावा के बादशाह ने अटेरी के राजा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। बाद में इटावा के बादशाह को पता चला कि इस युद्ध के लिए उसका दरबारी भोलू सैय्यद जिम्मेदार था।

इससे नाराज बादशाह ने ऐलान किया कि सैय्यद को इस दगाबाजी के लिए तब तक जूतों से पीटा जाए जब तक कि उसका इंतकाल न हो जाए।

सैय्यद की मौत के बाद से ही उसकी कब्र पर जूते मारने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इटावा-बरेली मार्ग पर अपनी तथा परिवार की सुरक्षित यात्रा के लिए सैय्यद की कब्र पर कम से कम 5 जूते मारना जरूरी है।

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