नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलकिया के आमंत्रण पर 18वें आसियान-भारत सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी, कोविड-19 और स्वास्थ्य, व्यापार, शिक्षा व संपर्क सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई। पीएमओ ने कहा कि डिजिटल माध्यम से होने वाले इस सम्मेलन में आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के मुखिया भाग लेंगे। यह सम्मेलन प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है, जो आसियान और भारत को शीर्ष स्तर पर संवाद का मौका देता करता है। बता दें कि आसियान 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का समूह है, जिसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम हैं।
पीएमओ ने कहा कि इस आयोजन से एक दिन पहले बुधवार को प्रधानमंत्री 16वें पूर्वी-एशिया शिखर सम्मेलन में भी डिजिटल माध्यम से हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद सहित क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय हित के मुद्दों एवं चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन भारत-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों और क्षेत्र में एक प्रमुख विश्वास-निर्माण तंत्र पर चर्चा करने के लिए एक प्रमुख नेतृत्व-प्रधान मंच है। पूर्वी एशिया के रणनीतिक और भौगोलिक अभ्युदय में इस मंच ने अहम भमिका निभाई है। इसमें 10 आसियान देशों के सदस्यों के अलावा भारत, चीन, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और रूस शामिल हैं।
पीएमओ ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रुनेई के सुल्तान के आमंत्रण पर डिजिटल माध्यम से होने वाले 18वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में 28 अक्टूबर को हिस्सा लेंगे।’’ पिछले कुछ वर्षों में भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों में प्रगति देखी गई है। इस दौरान व्यापार और निवेश के साथ ही सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को आगे ले जाने को केंद्र में रखा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल नवंबर में 17वें आसियान सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था। इस बार वह 18वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
पीएमओ ने कहा कि आसियान-भारत साझेदारी साझा भौगोलिक, ऐतिहासिक और सभ्यता के मजबूत आधारों पर आधारित है। आसियान समूह शुरू से भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति' और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर व्यापक दृष्टिकोण का मूल केंद्र रहा है। वर्ष 2022 आसियान-भारत संबंधों के 30 वर्षों का गवाह बनेगा। गौरतलब है कि आसियान का उद्देश्य साझे हित और चिंता के राजनीतिक तथा सुरक्षा मुद्दों पर रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास बहाली तथा निरोधात्मक राजनय की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देना है।
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