लखनऊ: पिता की शहादत ने बेटे की जिंदगी का मकसद ही बदल कर रख दिया। बेटा भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चल पड़ा है। लोगों के लाख समझाने पर भी बेटे ने एक न सुनी और यही कहा कि खाकी और शहादत हमारे परिवार की पंरपरा है, जिसे कायम रखना है। टीसीएस कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकर छोड़ अब उसकी एक ही जिद है, पुलिस फोर्स जॉइन करना।
यह कहानी है अंबेडकरनगर जहागीरगंज के सेमरा गांव के विनीत मिश्र की, जिन्होंने प्रतिष्ठित टीसीएस कंपनी की 18 लाख रूपए सालाना पैकेज की सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी। लोगों ने समझाया कि पुलिस की नौकरी में सैलरी कम और तनाव ज्यादा है लेकिन विनीत अपने फैसले पर अडिग रहे।
विनीत, शहीद कांस्टेबल विजय प्रताप मिश्र के बेटे हैं। विजय अमेठी में उपद्रवियों से मोर्चा लेते समय 14 सितंबर 2014 को शहीद हो गए थे। विजय का बड़ा बेटा विनीत टीसीएस में इंजीनियर है तो छोटा बेटा विपुल सीए की पढ़ाई कर रहा है।
परिवार की परंपरा है शहादत
विनीत ने बताया कि खाकी और शहादत उसके परिवार की परंपरा रही है। उनके ताऊ कपिल मुनि मिश्र भी सिपाही थे। 1984 में उन्नाव उपद्रवियों ने हमला कर दिया था। ताऊ मोर्चा लेते रहे और अंत में उपद्रवियों की गोली ने उनकी जान ले ली। ताऊ की जगह उनके बेटे घनश्याम को नौकरी मिली, जो अब एसआई है।
पैसा तो सब कमा लेंगे पर ऐसा सम्मान नहीं
बुधवार को जब उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव ने विनीत की मां माधुरी मिश्रा को नमस्कार करते हुए हालचाल पूछे तो वे फफक पड़ी। मुख्यमंत्री के जाते ही विनीत ने कहा, ‘देखा मां रूपया तो सब कमा लेंगे लेकिन यह सम्मान कम ही मिलता है। आज लगा कि पिताजी की शहादत बेकार नहीं गई।’
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