नई दिल्ली: आज केंद्र सरकार दूसरा रेल बजट पेश करेगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट से पहले कहा कि उनका ध्यान रेलवे की बेहतरी की तरफ है। वहीं जनता के लिए राहत भरी खबर यह हो सकती है कि प्रभु शायद ही रेल किराए और मालभाड़े में बढ़ोतरी करेंगे। रेल मंत्री का पूरा ध्यान फिलहाल सुविधाओं पर केंद्रित है। पिछली बार की ही तरह हो सकता है कि इस बार भी नई ट्रेनों का ऐलान न किया जाए। गौरतलब है कि सुरेश प्रभु के पिछले रेल बजट में किसी भी नई ट्रेन का ऐलान नहीं हुआ था।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रभु अपने इस बजट में रेल किराए और मालभाड़े में बढ़ोतरी नहीं करेंगे। उम्मीद है कि इस बार भी मोदी सरकार का फोकस मौजूदा नेटवर्क को बेहतर करने और इस समय चल रही ट्रेन्स में सुविधाएं बढ़ाने पर रहेगा। रेलवे के लिए टिकट कन्फर्म नहीं होना एक बड़ी समस्या है, इससे निपटने के लिए हर ट्रेन में एक एक्स्ट्रा कोच लगाया जाएगा जो सिर्फ Unconfirmed टिकट वालों के लिए ही होगा। रेल बजट की एक और बड़ी बात ये होगी कि किसी नई ट्रेन का एलान नहीं होगा। हालांकि सुविधा ट्रेन के नाम से कुछ नई सुविधा ट्रेनों का एलान हो सकता है।
महामना एक्सप्रेस जैसी कुछ और ट्रेन्स चलाई जा सकती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर किराया और माल भाड़ा नहीं बढा तो फैसिलिटी बढ़ाने के लिए पैसे कहां से आएंगे। जानकारी के मुताबिक इसके लिए रेलवे की प्रॉपर्टी का कमर्शियल इस्तेमाल किया जाएगा। स्टेशन पर ब्रांडिंग और Ad पर ज़ोर दिया जाएगा, बिज़ली बचाने और साफ-सफाई पर खास ध्यान रखा जाएगा और सुरेश प्रभु चार सौ नए ग्रीन स्टेशन का एलान कर सकते हैं।
पिछले साल का बजट बदलाव का बजट था-
जहां तक पिछले बजट का सवाल है, तो वो स्पष्ट तौर पर बदलाव का बजट था, जहां रेलवे की प्राथमिकता तय की गई थी और उसी के मुताबिक ही बजट तैयार किया गया था। पिछले कई बार के बजटों में आपने देखा होगा कि अलग-अलग वजहों से रेल बजट अपने उद्देश्य से भटकता रहा है। इसी वजह से आज रेलवे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। रेलवे पर बढ़े पीछे के अत्यधिक भार को अब ठीक करना जरूरी हो गया है। मैंने पहले भी कहा है कि ये एक साल में ठीक नहीं होगा। इसके लिए कम से कम पांच साल लगेंगे। सच तो ये है कि पांच साल भी इसके लिए पर्याप्त नहीं है।
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