नई दिल्ली: ऐसा शायद ही पहले कभी हुआ हो, लेकिन याकूब मेमन की फांसी पर रोक की मांग पर आधी रात के वक्त 2.30 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले प्रशांत भूषण और नित्या रामाकृष्णनन समेत सुप्रीम कोर्ट कुछ अन्य वकील चीफ जस्टिस के घर पहुंच गए थे। उनकी मांग थी कि याकूब की फांसी पर 14 दिन की रोक लगे। कुछ समय बाद सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार भी वहां पहुंच गए थे।
चीफ जस्टिस ने सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्रा के घर पर होने का फैसला किया था। जस्टिस मिश्रा उन तीन जजों की बेंच के प्रमुख थे, जिसने बुधवार सुबह याकूब मामले पर फैसला किया था। सुनवाई रात दो बजकर 30 मिनट से जारी होनी है।
राष्ट्रपति ने फिर दया याचिका खारिज की
याकूब मेमन को नागपुर जेल में सुबह 7 बजे फांसी देने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उच्चतम न्यायालय ने आज याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन को कल दी जाने वाली मौत की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। इस मामले में राष्ट्रपति के पास दूसरी बार दया याचिका भेजी गई थी जिस पर राष्ट्रपति ने गृहमंत्रालय से राय मांगी थी।
गृह मंत्रालय ने याचिका में कुछ नया नही पाया जिसके बाद राष्ट्रपति और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात हुई, जिसके बाद याकूब की दया याचिका खारिज कर दी गई। इससे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी याकूब की दया याचिका खारिज कर दी।
इस वक्त भी कुछ एक्टिविस्ट वकील और याकूब के एड्वोकेट्स एक बार फिर सुप्रीमकोर्ट में फांसी की सजा को 14 दिन के लिए आगे बढ़ाने की पेटीशन दायर करने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मिलने की कोशिश में जुटे हुए हैं। खबर लिखे जाने तक वकील उनसे मिलने में सफल नहीं हो सके हैं।
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