मुंबई: स्कॉर्पीन डेटा लीक मामले में प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि लीक भारत में नहीं हुआ बल्कि फ्रांस में रक्षा कंपनी डीसीएनएस के कार्यालय में हुआ है। यह बात मुंबई में शनिवार को नौसेना प्रमुख ऐडमिरल सुशील लांबा ने कही। वह प्रॉजेक्ट 15बी के दूसरे पोत निर्देशित मिसाइल विध्वंसक मर्मागोवा को शुरू करने के बाद बोल रहे थे।
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ऐडमिरल लांबा ने कहा, ‘उच्चस्तरीय समिति हमारी तरफ भी स्कॉर्पीन लीक मामले की जांच कर रही है। इस जांच के आधार पर हम देखेंगे कि क्या करने की जरूरत है, किसी एहतियाती कदम की जरूरत है अथवा नहीं। मामले में प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि लीक भारत में नहीं हुआ बल्कि फ्रांस में डीसीएनएस के कार्यालय में हुआ। फ्रांस में डीसीएनएस और फ्रांस सरकार ने जांच शुरू की है। इस जांच के आधार पर हम देखेंगे कि क्या करने की जरूरत है।’
भारतीय नौसेना के लिए मुंबई में डीसीएनएस के सहयोग से बनने वाले 6 अति उन्नत स्कॉर्पीन पनडुब्बी की क्षमता से संबंधित 22 हजार पन्नों से ज्यादा गोपनीय डेटा लीक हो गया था जिससे सुरक्षा प्रतिष्ठानों में खलबली मच गई थी। स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की क्षमता उस समय सार्वजनिक हो गई जब ऑस्ट्रेलियाई अखबार द ऑस्ट्रेलियन ने वेबसाइट पर इसके ब्यौरे को उजागर कर दिया। ये पनडुब्बि्यां 3.5 अरब डॉलर की लागत से मुंबई के मझगांव डॉक पर बनाई जानी हैं। लीक दस्तावेजों में से कुछ सूचना पनडुब्बियों के जल के अंदर युद्ध प्रणाली पर निर्देशन संचालन के बारे में थे जिनका उपयोग पानी के अंदर खुफिया सूचना जुटाने में होता है।
इससे पहले स्वदेश निर्मित युद्धक पोत मर्मागोवा को लांच किया गया जो उच्च तकनीक के मिसाइल से लैस है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि युद्धक विध्वंसक पोत की तुलना दुनिया के बेहतरीन पोत से किया जा सकता है। पोत का निर्माण सरकारी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है और प्रॉजेक्ट 15बी के तहत यह विशाखापत्तनम श्रेणी का पोत है। पोत का परीक्षण किया जाएगा और इसे आईएनएस मर्मागोवा के नाम से जाना जाएगा।
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