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राजस्थान मैं देश की पहली सीवरेज एवं वेस्ट वाटर नीति को मंजूरी

राजस्थान सरकार ने राज्य की सीवरेज एवं वेस्ट वाटर नीति 2016, अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन के साथ ही विभिन्न सेवाओं के नियमों में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए।

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जयपुर: राजस्थान सरकार ने राज्य की सीवरेज एवं वेस्ट वाटर नीति 2016, अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन के साथ ही विभिन्न सेवाओं के नियमों में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए। संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिये गये निणयों की जानकारी संवाददाताओं को देते हुए बताया कि यह नीति लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है।

यह नीति आगामी 30 वर्ष की आवश्यकताओं को पूरा करेगी। नीति के तहत यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि सभी आवासों को सीवरेज कनेक्शन से जोड़ा जाए ताकि वर्षा जल के अतिरिक्त किसी भी आवास का जल नालियों या सड़क पर न बहे तथा बिना ट्रीटमेंट के कोई भी अपशिष्ट बाहर न जाए।

राठौड़ ने बताया कि इस नीति के तहत उन शहरों को प्राथमिकता दी जायेगी, जिनमें जल उपयोग 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन या अधिक है। आगामी पांच वर्षों में सभी जिला मुख्यालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले शहर, हैरिटेज कस्बों तथा एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को शत प्रतिशत सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। 10 हजार से एक लाख की आबादी वाले शहरों को 10 साल में तथा 50 हजार से कम आबादी वाले शहरों को 15 साल में सीवरेज व्यवस्था से जोड़ा जायेगा। सीवरेज कनेक्शनयुक्त शहरों में 6 माह में तथा नए जुड़ने वाले शहरों में 3 माह में कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा।

उन्होंने बताया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट से शोधित जल को पारदर्शी तरीके से विक्रय किया जा सकेगा। शोधित जल का उपयोग औद्योगिक, व्यावसायिक, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, लैंड स्कैपिंग आदि कार्यों में किया जा सकेगा।

राठौड ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के प्रथम चरण की समीक्षा और 16 नवम्बर से दूसरे चरण की शुरूआत के निर्णय का अनुमोदन करने के साथ ही रिसर्जेंट राजस्थान के तहत आए 2 हजार 520 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को विशेष सुविधा पुंज देने की मंजूरी दी। इन औद्योगिक इकाइयों से 6 हजार 700 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।

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