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राजनाथ ने कश्मीरी नेताओं से की मुलाकात, प्रदर्शन के दौरान एक मरा

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घाटी में हफ्तों से जारी अशांति और हिंसा के चक्र को तोड़ने के लिए मुख्य राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की।

rajnath singh- India TV Hindi
rajnath singh

नई दिल्ली: कश्मीर घाटी में बुधवार को सुरक्षा बलों के साथ झड़प की विभिन्न घटनाओं में एक 18 वर्षीय किशोर की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए। इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घाटी में हफ्तों से जारी अशांति और हिंसा के चक्र को तोड़ने के लिए मुख्य राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की।

पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर के पिंगलिना गांव में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुए संघर्ष में वह किशोर पेलेट से घायल हो गया था। उसे एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। यह जगह श्रीनगर से 30 किलोमीटर दूर है। झड़प में कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं।

कुछ घंटे बाद भीड़ में से एक संदिग्ध आतंकी ने पुलवामा शहर में सुरक्षा बलों पर बम फेंका। यह पिंगलिना गांव से कुछ किलोमीटर और दक्षिण में स्थित है। इस हमले में एक पुलिस अधीक्षक और थानेदार समेत नौ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

कर्फ्यू और पथराव कर रहे दर्जनों युवकों की गिरफ्तारी के बावजूद श्रीनगर के कुछ हिस्से और उत्तरी कश्मीर में भी प्रदर्शन हुए हैं। आठ जुलाई को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में जारी अशांति के दौरान मृतकों की संख्या बढ़कर 69 हो गई है। नागरिकों और सुरक्षा बलों सहित हजारों लोग घायल हुए हैं।

बुधवार की घटना ऐसे समय में घटी है, जब राजनाथ सिंह सुरक्षा हालात की समीक्षा करने कश्मीर पहुंचे हैं। वह जम्मू एवं कश्मीर में नागरिक समाज के सदस्यों और राजनीतिज्ञों के साथ बातचीत कर रहे हैं। एक माह में कश्मीर का यह उनका दूसरा दौरा है।

राजनाथ सिंह ने यहां सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। जानकार सूत्रों के अनुसार मुख्य धारा के राजनेताओं ने केंद्र सरकार पर अलगाववादी नेताओं सहित सभी संबंधित पक्षों से बात करने का दबाव डाला है।

हालांकि श्रीनगर स्थित सरकारी सूत्रों ने मंत्री के अलगाववादी गुटों से मुलाकात की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है। अलगाववादी ही जम्मू-कश्मीर में आत्म निर्णय के अधिकार के नाम पर इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।

हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी कहा कि अलगाववादी नेताओं ने भी कहा है कि सरकार से भारतीय संविधान के दायरे में बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

मीरवाइज ने भारत, पाकिस्तान और दोनों देशों में बंटे जम्मू एवं कश्मीर की जनता को मिलाकर त्रिपक्षीय वार्ता की मांग दोहराई है।

घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास के तहत राजनेताओं और नागरिकों से बातचीत करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह दो दिवसीय कश्मीर दौरे पर हैं। उनके साथ गृह सचिव राजीव महर्षि और वरिष्ठ अधिकारी भी हैं।

उन्होंने पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के कमांडरों एवं खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता की।

बताया जाता है कि गृह मंत्री ने विरोध प्रदर्शन से निबटते समय अधिकतम संयम बरतने को कहा है लेकिन यह भी कहा है कि भीड़ में मिले आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

गृह मंत्री डल झील के पूर्वी छोर के पास ऐतिहासिक नेहरू गेस्ट हाउस में ठहरे हैं।

कश्मीर में शांति बहाली की कोशिशों के तहत गृह मंत्री राजनाथ सिंह आज दो दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंचे। गृह मंत्री ने अमन पसंद लोगों को बातचीत का न्योता दिया है। राजनाथ सिंह का पिछले एक महीने में ये दूसरा कश्मीर दौरा है। 

दौरे में जाने से पहले ट्वीट में ये कहा राजनाथ ने
राजनाथ ने कश्मीर जाने से पहले ट्विट में कहा कि मैं सिविल सोसाइटी के समूहों, राजनीतिक दलों और कश्मीर में मौजूद दूसरे स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करूंगा। उन्होंने कहा कि जो कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हुरियत में भरोसा करते हैं, उन लोगों का स्वागत है।

बुरहान की मौत के बाद से चल रहा है हिंसा का दौर
राजनाथ यहां लोगों से चर्चा करने पहुंचे हैं ताकि बुरहान वानी की मौत के बाद पिछले डेढ़ महीने से घाटी में जारी घमासान को खत्म किया जा सके। एक महीने के अंदर गृह मंत्री राजनाथ सिंह का यह दूसरा जम्मू-कश्मीर दौरा है। पिछले डेढ़ महीने के दौरान हिंसा में 2 पुलिसकर्मियों समेत 70 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग घायल हुए हैं।

लोगों से संवाद बनाए रखने के लिए दौरा
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले दौरे के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि लोगों से बातचीत बनाए रखने के लिए वह जम्मू-कश्मीर का दौरा जारी रखेंगे। राजनाथ का यह दौरा इसी की एक कड़ी है। सरकार की कोशिश है कि संविधान के दायरे में राज्य की समस्य़ा का हल निकाल जा सके।

 

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