मथुरा: मथुरा हिंसा के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव की नीली डायरी से उसके सीक्रेट फंड का खुलासा हो गया है। पुलिस को जवाहर बाग से एक जली हुई डायरी मिली है जिससे रामवृक्ष की पाई-पाई का हिसाब सामने आ गया है। इस डायरी से इस बात का खुलासा हुआ है कि रामवृक्ष यादव और उसके संस्था को लाखों का डोनेशन हर महीने अलग-अलग राज्यों से मिलता था औऱ वो इस रकम का इस्तेमाल पार्क के रखरखाव से लेकर पानी, जेनरेटर और टैक्सी के किराए तक पर खर्च करता था। साथ ही अपने खिलाफ चल रहे कोर्ट केस के लिए वकील को भी लाखों का पेमेंट करता था। इस डायरी में अलग-अलग तारीखों की अलग-अलग एंट्री है जिसमें उसके खर्चों के पाई-पाई का हिसाब है।
मास्टरमाइंड का सीक्रेट फंड
डायरी में 5 मई 2014 की इंट्री है। इस इंट्री में बताया गया है कि-
- जवाहर बाग के रखरखाव पर 32 लाख का खर्च हुआ।
- यहां रहने वाले समर्थकों के टेंट की मरम्मत पर 22 हजार 500 सौ रुपए का खर्च दिखाया गया है।
- पार्क में पानी की व्यवस्था के लिए 36 हजार का खर्च दिखाया गया है।
- अपने ऊपर चल रहे केस के एवज में भी इस संस्था 'वकील दिल्लीवाले' के नाम एक शख्स को 84 हजार, 25 हजार, 7 हजार और 4 हजार की पेमेंट की।
- वकील से मिलने दिल्ली जाने के लिए टैक्सी का किराया 5 हजार दिखाया गया है।
- डायरी में 18 जुलाई 2014 की एंट्री में जवाहर बाग के रखरखाव पर 47 लाख का खर्च दिखाया गया है जबकि मध्यप्रदेश, पंजाब, कानपुर, दिल्ली के लिए टैक्सी का खर्च 75 हजार दर्शाया गया।
- बिहार का डॉक्टर के नाम से एक इंट्री है जिसे दवाओं के लिए पंद्रह सौ की पेमेंट की गई है।
- पार्क में सीएफएल ब्लब और जेनरेटर के डीजल के लिए भी बड़ी रमक का खर्च को डायरी में दिखाया गया है।
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रामवृक्ष को पैसे कौन देता था ?
नीली डायरी से जो खुलासा हुआ है कि उसके मतुाबिक बरेली, कन्नौज, सूरत, कटक से बतौर डोनेशन रुपए मिलते थे। डायरी में कटक से 2 लाख 24 हजार के डोनेशन का जिक्र है। वहीं बरेली से दो लोगों ने मास्टरमाइंड़ के इस सीक्रेट फंड 10-10 हजार का डोनेशन दिया। इसके अलावा इस डायरी में उड़ीसा से हर महीने 22 लाख, बनारस से 10 लाख, कन्नौज से 7 लाख, उन्नाव से 8 लाख के डोनेशन मिलने का भी जिक्र है। उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके के दर्जनों लोगों के नाम और लाखों के डोनेशन का भी जिक्र डायरी में है।
इससे पहले जवाहर बाग से पुलिस को भारी मात्रा में हथियार भी मिले थे। जवाहर बाग में क्या कुछ हो रहा था इसे लेकर स्थानीय प्रशासन लगातार यूपी सरकार को सूचनाएं भेज रहा था। डीएम राजेश कुमार ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर 20 फरवरी को गृह विभाग के प्रमुख सचिव को चिट्ठी लिखी थी। साफ है मथुरा के जवाहर बाग में क्या कुछ चल रहा था इसकी पूरी जानकारी जिला प्रशासन को थी औऱ प्रशासन ने इसे लेकर सरकार को भी सचेत किया था। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर दो साल से ज्यादा समय तक जवाहर पार्क में ये सब किसकी इजाजत से चलता रहा।
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