फाइनेंशियली टेंशन फ्री
लिव इन पार्टनर को अपने साथी का खर्च नहीं उठाना पड़ता है, कमरे के बेड से लेकर खाने-पीने की चीजों तक में दोनों 50-50 भागीदार होते हैं जो कि युवाओं को काफी भाता है इसी कारण दोनों शादी के बजाय लिव इन पार्टनर बनने की कोशिश करते हैं।
Latest India News