नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सुधार का संबंध सिर्फ बड़े निवेश और विनिवेश की घोषणाओं से नहीं है और उन्होंने कहा कि सक्षमता, सब्सिडी को बेहतर लक्षित कर और नेक इरादों को अमलीजामा पहनाकर भी आर्थिक लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। एक समाचारपत्र के कार्यक्रम में मोदी ने सरकार की सोच और दिशा पर रोशनी डाली।
मोदी ने उद्योगपतियों की उम्मीदों का जिक्र किया और संकेत दिया कि बिना सुर्खियों में आए और सामाजिक तनाव पैदा किए बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के लिए भी काम कर रही है।
100 शहरों में एलईडी बल्बों के उपयोग की कोशिश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे 21,500 मेगावाट बिजली की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इतनी बिजली पैदा करने के लिए सवा लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। यदि इस निवेश की घोषणा की जाए, तो वह अखबार की सुर्खी बन जाएगी।
उन्होंने कहा, "एलईडी से हर साल 45 हजार करोड़ रुपये की भी बचत होगी। आप सोच सकते हैं कि किस तरह बदलाव आ रहा है।" उन्होंने कहा कि रसोई गैस आपूर्ति को नकद सब्सिडी भुगतान से जोड़ने से सब्सिडी के करोड़ों रुपये का बचत होने लगा है। उन्होंने कहा, "हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है। हम लक्ष्य को अलग तरह से भी हासिल कर सकते हैं।" दो दिवसीय सम्मेलन का थीम है- क्या भारत दुनिया का चमकता हुआ स्थान हो सकता है।
80 हजार करोड़ रुपये की यूरिया सब्सिडी के बारे में मोदी ने कहा कि गैर-कृषि कार्यो में यूरिया का उपयोग रोकने के लिए इस पर नीम की कोटिंग की जा रही है। इससे सब्सिडी का बड़ा खर्च बचेगा। उन्होंने कहा कि 85 में से 65 लंबित परियोजनाएं चालू हो गई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराष्ट्र के दाभोल बिजली संयंत्र से मध्य रेल को बिजली मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि कोयले की आपूर्ति की बाधा दूर होने से बिजली उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, "जब तक बंदरगाहों को रेल से नहीं जोड़ा जाता हम वैश्विक रूप से प्रतियोगी नहीं हो सकते हैं।" उन्होंने कहा कि सुधारवादी कहेंगे कि सरकारी कंपनियों का विनिवेश होना चाहिए और जब आप ऐसा करेंगे, तो कामगार उसका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ाने का अन्य विकल्प है कंपनियों का कॉरपोरेटीकरण करना और कंपनियों के संचालन से राजनीति दूर करना।
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