नई दिल्ली: पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों ने इतिहास रच दिया। 88 साल बाद यहां छात्रसंघ चुनाव में किसी महिला को अध्यक्ष पद की कुर्सी मिली है। इस बार ये बाजी अर्थशास्त्र विषय में शोध की छात्रा ऋचा सिंह के हाथ लगी है जिन्हें समाजवादी छात्र सभा का समर्थन था।
यही नहीं पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने चार प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कराई। केंद्रीय विश्वविद्यालय का यह पहला चुनाव है जिसमें चार प्रमुख पदों पर जीतने वाले प्रत्याशी एक ही छात्र संगठन के पैनल के हैं।
128 साल पुराने विश्वविद्यालय में बुधवार को मतदान हुआ था। रात 11 बजे जब नतीजे घोषित हुए तो इतिहास रचा जा चुका था। ऋचा सिंह को 2253 मत मिले जबकि निकतम प्रतिद्दी रजनीश कुमार सिंह को 2242 मत मिले थे। हार-जीत का अंतर सिर्फ 11 वोटों का था।
कौन है ऋचा सिंह?
इकोनॉमिक्स से एम.ए करने वाली ऋचा सिंह यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च स्कॉलर हैं। वो मूलरुप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं। ऋचा ने चार साल पहले फ्रेंड्स यूनियन क्लब बनाया। जिसको वह लीड कर रहीं थीं। इसके बाद जब यूनिवर्सिटी में इलेक्शन हुए तो वह भी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने लगीं। वैसे विश्वविद्यालय कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जैसी मजबूत पार्टी थीं। सिर्फ हाथ से लिखे पोस्टर, तख्ती, हैंलबिल और छोटे-छोटे नुक्कड़ नाटक, घर-घर संपर्क के दम पर वो बिना धनबल और बाहुबल के कैंपेन करने लगी। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता गया उनकी बढ़ती ताकत के साथ अन्य लोग भी जुड़ते गए और ऋचा ने सबको मात देते हुए विजय हासिल की।
जवाहर लाल नेहरू की भतीजी थी पहली महिला अध्यक्ष
इससे पहले 1927 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की भतीजी श्याम कुमारी नेहरू ने यहां पर अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था। हालांकि इस बार के चुनाव में अध्यक्ष पद को छोड़कर सभी प्रत्याशी एबीवीपी के जीते हैं। फिर बीजेपी के छात्र इकाई की इस जीत को अधूरा माना जा रहा है।
Latest India News