नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य बनाने वाले हरियाणा सरकार के कानूनों के लागू होने पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। राज्य सरकार के चुनावों के मद्देनजर तय किए गए पैमाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले में कोर्ट ने सरकार को एक नोटिस भेजकर उस पर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। जब तक सरकार इस मसले पर जवाब नहीं दे देती पहले के नियम लागू रहेंगे। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने पंचायती राज कानून में बदलाव लाने संबंधी संशोधन विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया था।
क्या था नियम-
राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए कुछ शर्तें लगा दी थीं, जिसमें शैक्षणिक योग्यता अहम मसला था। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए महिलाओं और एससी वर्ग के लिए उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 8वीं पास और सामान्य उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 10वीं पास निर्धारित किया गया।
क्या थी मुश्किल-
साल 2011 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में 20 साल से अधिक की सिर्फ 16 फीसदी आबादी ही 10वीं पास की शैक्षणिक योग्यता पूरा करती है। आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा के ग्रामीण इलाकों की 69.9 फीसदी आबादी मुश्किल से 8वीं या उससे कम कक्षा तक पढ़ी-लिखी है। यानी आरक्षित सीटों पर लड़ना भी अब कईयों के लिए मुश्किल हो सकता है। सीधे सीधे शब्दों मे कहें तो राज्य की 84 फीसदी आबादी सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है।
नए नियम के विरोध में क्या दलील-
एक याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि इस नए नियम के मुताबिक 83 फीसदी दलित महिलाएं चुनाव ही नहीं लड़ पाएंगी।
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