नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय गुरुवार को इटली सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उसने अपने नौसैनिक सार्जेट मेजर सेल्वाटोर गिरोन की जमानत शर्तो में ढील देने की मांग की है, ताकि वह स्वदेश लौट सके। गिरोन इटली के उन दो इतावली नाविकों में से एक हैं, जिन पर 2012 में केरल तट से दूर दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की अवकाश पीठ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद द्वारा इटली सरकार की इस याचिका का समर्थन करने पर इस पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई।
इटली की सरकार ने जमानत शर्तो में छूट इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के 29 अप्रैल के उस आदेश को देखते हुए मांगी है, जिसमें भारत व इटली को जमानत शर्तो में ढीलर को लेकर सहयोग करने के लिए कहा गया है, ताकि गिरोन मध्यस्थता कार्रवाई के लंबित रहने के दौरान अपने देश लौट सके। भारतीय मछुआरों की हत्या के अन्य आरोपी इटली नाविक चीफ मास्टर सर्जेट मासीमिलियानो लैटोर खराब तबीयत व इलाज के आधार पर पहले ही इटली में हैं। केंद्र ने पूर्व में न्यायालय को सूचित किया था कि मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कार्यवाही दिसंबर 2018 तक पूरी हो जाएगी। न्यायालय ने पूर्व में दोनों मरीनों पर मुकदमे सहित आपराधिक कार्यवाही को स्थगित कर दिया था।
भारत और इटली के संयुक्त आग्रह को स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि कार्यवाही तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि अधिकारक्षेत्र के इस मुद्दे पर कि किस देश को मुकदमा चलाने का अधिकार है, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत फैसला नहीं कर देती। ये दोनों मरीन पोत एनरिका लेक्सी पर सवार थे। वे 15 फरवरी 2012 को केरल के अपतटीय क्षेत्र में दो भारतीय मछुआरों को मार देने के आरोपी हैं। इन मरीनों के खिलाफ मछली पकड़ने वाली नौका सेंट एंटनी के मालिक फ्रेडी ने शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों भारतीय मछुआरे इसी नौका में सवार थे। इतालवी मरीनों ने उन्हें कथित तौर पर समुद्री डाकू समझकर गोली मार दी थी ।
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