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WorkPlace पर सुरक्षित नहीं महिलाएं, दो साल में सैक्सुअल हैरासमेंट की शिकायतें 7गुना बढ़ीं

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में बीते दो सालों में WorkPlace पर सैक्सुअल हैरासमेंट के मामले में एक या दो नहीं बल्कि सात गुना इजाफा हुआ है। ये आकंड़े भारत की उन 10 दिग्गज फर्मों के हैं जहां पर महिलाओं को अब भी शिकार होना पड़ता है।

Sexual Harassement- India TV Hindi
Sexual Harassement

नई दिल्ली: हमारे देश में महिला सुरक्षा को लेकर तरह तरह की बातें की जाती हैं, सड़क से लेकर संसद तक तरह तरह के विरोध प्रदर्शन होते हैं, महिलाओं के सम्मान को बरकरार रखने की खातिर सख्त कानून बनाने की भी बातें होती हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बीते दो सालों में WorkPlace पर सैक्सुअल हैरासमेंट के मामले में एक या दो नहीं बल्कि सात गुना इजाफा हुआ है। ये आकंड़े भारत की उन 10 दिग्गज फर्मों के हैं जहां पर महिलाओं को अब भी शिकार होना पड़ता है। वो शिकायतें भी दर्ज करती हैं लेकिन इनमें कमी आने के बजाए लगातार इजाफा ही हो रहा है।

सैक्सुअल हैरासमेंट एक्ट एट वर्कप्लेस के आने के दो साल के बाद भी कंपनियां और सरकार इसी उधेड़बुन में लगी हैं कि इस कानून के प्रावधान किस तरह काम करेंगे। आपको बता दें कि इस तरह के कानून के लिए एक खाका 18 साल पुराने विशाखा गाइडलाइन के आधार पर तैयार किया गया था जिसे विशाखा गाइडलाइन के तौर पर जाना जाता है। विशाखा गाइडलाइन के मुताबिक हर कंपनी के लिए यह बाध्यकारी है कि वो एक आंतरिक शिकायत समिति का गठन करे और वह ऐसे मामलों का निपटान करेगी जो वर्क प्लेस पर महिलाओं के सैक्सुअल हैरामेंट जैसे मामलों से संबंधित होंगे।

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भले ही इस कानून ने ऐसी समितियों के गठन को कंपनियों के लिए जरूरी कर दिया है, लेकिन कंपनियों के लिए ऐसी समितियों के निर्माण की स्थिति और उनके दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन का खुलासा करना जरूरी नहीं है। इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि प्राइवेट सेक्टर में हुईं ऐसी घटनाएं तब तक सामने नहीं आएंगी जब तक कि इस मामले की शिकायत पुलिस से न की जाए। इस ओर ध्यान आकर्षित करवाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हाल ही में प्रस्ताव दिया था कि कंपनिया किस तरह से आंतरिक शिकायत समिति का गठन करती हैं और यह कैसे काम करता है इस बारे में वो अपनी सालाना रिपोर्ट में बताएंगी और यह बताना जरूरी होगा। हालांकि उनका यह प्रस्ताव उनके ही कैबिनेट के साथी अरुण जेटली द्वारा ठुकरा दिया गया था।

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