मुंबई: देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडिया का कल रात दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया। वह 68 साल के थे। बंबई उच्च न्यायालय सूत्रों ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक फैसले दिए थे। न्यायमूर्ति कपाडिया का अंतिम संस्कार आज शाम पारसी परंपरा के अनुसार दक्षिण मुंबई के केम्प्स कार्नर में टावर ऑफ साइलेंस में हुआ। उनके अंतिम संस्कार कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और कर्मी भी शामिल हुए।
न्यायमूर्ति कपाडिया का जन्म 1947 में मुंबई (तब बंबई) में हुआ था और उन्होंने नगर स्थित गवर्नमेंट लॉ कालेज से शिक्षा प्राप्त की। यह संस्थान एशिया का सबसे पुराना विधि संस्थान है। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके पुत्र चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं।
वह 10 सितंबर 1974 को बंबई उच्च न्यायालय में वकील बने। उन्हें आठ अक्टूबर 1991 को बंबई उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 23 मार्च 1993 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह पांच अगस्त 2003 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। 18 दिसंबर 2013 को उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह 12 मई 2010 को देश के 38वें प्रधान न्यायाधीश बने और इस पद से 29 सितंबर 2012 को सेवानिवृत्त हुए।
उनके महत्वपूर्ण फैसलों में 2011 में मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति को रद्द किया जाना शामिल है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द किए जाने से जुड़े मामले में असहमति के साथ फैसला दिया था। उच्च न्यायालय के कर्मियों ने न्यायमूर्ति कपाडिया को श्रद्धांजलि दी।
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