नई दिल्ली: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो साल में दो बार आती है। पहली फाल्गुन मास में और दूसरी श्रावण मास में। दोनों का मूलसार एक ही है भगवान शिवशंकर का जलाभिषेक करना।
फाल्गुन और श्रावण मास में आने वाली महाशिवरात्रि के धार्मिक पक्ष भी अलग-अलग हैं। पहले बात करते हैं फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि की। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को पार्वती और शिव शंकर का विवाह हुआ था। इस दिन श्रद्धालु शिव शंकर और पार्वती की पूजा-अर्चना कर शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। उपवास रखने की परंपरा भी इस पर्व के साथ जुड़ी हुई है।
श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट जहर को भगवान शिव शंकर ने कंठ में धारण कर लिया और शिव शंकर का कंठ नीला पड़ गया था। इस वजह से शिव शंकर का नाम नीलकंठ पड़ा। यह दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का दिवस था।
इस त्योहार में श्रद्धालु पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना में भजन गाते हैं। कुछ लोग पूरे दिन और रात उपवास भी करते हैं। शिव लिंग को पानी और बेलपत्र चढ़ाने के बाद ही वे अपना उपवास तोड़ते हैं।
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