1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. गुजरात: थनगढ़ मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित

गुजरात: थनगढ़ मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित

समाज में चारों ओर से पड़ रहे दबाव के आगे झुकते हुए गुजरात सरकार ने 2012 में थनगढ़ में कथित तौर पर पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में तीन दलित युवकों की हत्या के मामले पर नए सिरे से जांच शुरू करवाई है।

Members of Dalit community Hold Placard during the Protest - India TV Hindi
Image Source : PTI Members of Dalit community Hold Placard during the Protest

गांधीनगर: समाज में चारों ओर से पड़ रहे दबाव के आगे झुकते हुए गुजरात सरकार ने 2012 में थनगढ़ में कथित तौर पर पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में तीन दलित युवकों की हत्या के मामले पर नए सिरे से जांच शुरू करवाई है। सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस विशेष जांच दल में राजकोट के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह, सूरत के पुलिस उपायुक्त (जोन-2) परीक्षित राठौड़ और पोरबंदर के जिला पुलिस प्रमुख तरुण कुमार दुग्गल शामिल हैं। गौरतलब है कि 22 और 23 सितंबर, 2012 को विरोध प्रदर्शन कर रही भीड़ पर पुलिस द्वारा चलाई गई गोली लगने से तीन दलित युवकों की मौत हो गई थी।

एसआईटी के गठन की घोषणा के ठीक बाद धरने पर बैठे तीनों दलित युवकों के परिजनों ने हड़ताल समाप्त कर दी। राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत और अभियोजन पक्ष के लिए एक विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति की घोषणा भी की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने प्रत्येक मृतक के परिवार वालों के लिए दो-दो लाख रुपया मुआवजा देने की घोषणा भी की।

उल्लेखनीय है कि गुजरात पुलिस ने हाल ही में मामले की जांच अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के साथ बंद कर दी थी। पुलिस की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सुरेंद्रनगर जिले के औद्योगिक इलाके में घटी इस घटना में किसी के खिलाफ किसी तरह का अपराध नहीं पाया गया। मामले में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके अलावा मामले में संलिप्त एक पुलिस अधिकारी पिछले चार साल से फरार है। मामले में अब तक एक भी आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया।

दलित समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील जिग्नेश मेवानी ने कहा, "हर तरह के उत्पीड़ने के मामलों में 60 दिन के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करना होता है। घटना के चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई आरोप-पत्र दाखिल नहीं की गई।"

हाल ही में ऊना में घटी घटना और थनगढ़ मामले को दलित कार्यकर्ता केंद्र में मोदी सरकार और उनके मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात सरकार के उन दावों का विरोध करने के लिए उठाते रहते हैं जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भाजपा को दलितों का हितैषी बताते रहे हैं। ऊना की घटना को लेकर हाल ही में गुजरात में दलित समुदाय ने विशाल रैली निकाली थी और थनगढ़ सहित दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में कार्यवाही की मांग की थी।

Latest India News