नई दिल्ली: सम-विषम योजना की अवधि के दौरान पीएम 1 की मात्रा में मामूली गिरावट आई है। इस बात का खुलासा केंद्र के सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च के आंकड़े में किया गया है। हालांकि, प्रदूषण स्तर पर स्पष्ट रुझान साफ तौर पर नहीं उभरा है क्योंकि अन्य प्रदूषकों तथा पीएम 2.5, पीएम 10 और सतह स्तर ओजोन के स्तर में सम-विषम योजना 15 अप्रैल से लागू किए जाने के बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
शहर की हवा की गुणवत्ता गुरुवार को बेहद खराब श्रेणी की रही। पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत स्तर क्रमश: 166 और 334 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। स्वीकृत सीमा क्रमश: 60 और 100 है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार पीएम1 का सर्वोच्च स्तर कम है और एक अप्रैल से 15 दिन की अवधि की तुलना में इस अवधि में अधिक गिरावट आई है।
भारत में पीएम 1 का कोई आधिकारिक सुरक्षित मानदंड फिलहाल नहीं है। यह योजना के दूसरे चरण के पहले दिन 30-35 यूजी:मी3 के आस-पास रहा और 23 अप्रैल को गिरकर तकरीबन 20 यूजी:मी3 पर आ गया। हालांकि कल यह 60 की सीमा को पार कर गया।
तीन अप्रैल से पहली बार ऐसा हुआ है। पीएम 1 कण एक माइक्रॉन से कम के कणों को मापता है और यह पीएम 2.5 और पीएम 10 की अपेक्षा काफी छोटा है और पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों का बड़ा उपोत्पाद है।
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