सुरेंदर मित्तल - आप 3 बजे रात को क्यों फ़ोन करते हो रात को मुझे ?
राधे मां- क्योकि ना हम रात को जगते हैं..
सुरेंदर मित्तल - हैं?
राधे मां- हम रात को जगते हैं..हम नाइट बर्ड हैं.
सुरेंदर मित्तल - नाइट बर्ड हो तो मुझे क्यों जगाते हो ?
राधे मां- तुम्हारी कॉलर ट्यून सुनने के लिए
सुरेंदर मित्तल- अच्छा कॉलर ट्यून इतनी पसंद है तो अपने में फीड कर लो
राधे मां- हां मैं अभी इसे फीड कर लेती हूं
सुरेंदर मित्तल- हां करो फिर इसको
राधे मां- हां
सुरेंदर मित्तल- तो इसे फीड कर लो ना..मुझे मत डिस्टर्ब मत किया करो
राधे मां- ठीक है, sorry नहीं करेंगे अब से
सुरेंदर मित्तल- नहीं नहीं ये तो कॉलर..प्रभु के भक्त कॉलर ट्यून सुनने के लिए रात को 3 बजे फोन नहीं करते
राधे मां- क्या ?
सुरेंदर मित्तल- प्रभु के भक्त कॉलर ट्यून सुनने के लिए रात के 3 बजे फोन नहीं करते
राधे मां- क्योंकि प्रभु की भक्त हूं, माता का जागरण था
सुरेंदर मित्तल- अच्छा माता का जागरण करते ही उस समय कॉलर ट्यून भी याद आ जाती है..वैरी गुड
राधे मां- यस ..क्योंकि देखिए संगीत तो एक कला है
राधे मां- हम पागल नहीं है भईया, हमारा दिमाग खराब है (गाना)
क्योंकि देखो तुम्हारे साथ रहने के लिए हम हैं पागल..देखो पागलों को पागल ही मिलते हैं ना..तुम भी पागल..हम भी पागल..पागलों की टोली..पागलों की साथी..हा हा...(हंसते हुए)
सुरेंदर मित्तल- हूं ..सही बात है
राधे मां- तुम पागल हो, हम भी पागल, हम दोनों पागल एक जैसे लगते हैं
सुरेंदर मित्तल- हूं
राधे मां- देखो ये जितने भी वर्ल्ड के लोग हैं ये वॉयस सुनने के लिए पागल हैं और तुमं..तुम
सुरेंदर मित्तल- तभी तुम उनके सामने बोलती नहीं हो..बोलती क्यों बंद करके रखी हुई है अपनी
राधे मां- हां क्योंकि वो पागल हैं मेरी वॉयस सुनने के लिए , तुम वैसे ही पागल हो..और पागल के साथ तुम बात कर रहे हो..
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