इस साल से शुरु हो जाएगा राम मंदिर का निर्माण: स्वामी
सुब्रमण्यम स्वामी ने आज कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में अगले साल के अंत तक धारा 370 को हटा लिया जाएगा और इस साल के अंत से अयोध्या में राम मंदिर बनना शुरु हो जाएगा।
ओवैसी ने फिर जम्मू एवं कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हमें कश्मीरियों से प्रेम करना चाहिए न कि सिर्फ कश्मीरी पंडितों से। काफी सारे कश्मीरी बच्चे अब भी लापता हैं। अगर एक आतंकवादी मारा जाता है तो उसके अंतिम संस्कार में 50,000 लोग जमा होते हैं। आप बताइए मुफ्ती मोहम्मद सईद के अंतिम संस्कार के वक्त कितने लोग मौजूद थे। भाजपा सत्ता में है आप राज्य में किस तरह की सरकार चला रहे हैं।”
वहीं यूनीफॉर्म सिविल कोड पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि इस देश की विविधता को बचाने की जरूरत है वर्ना यह वास्तविकता नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा, “एक विविधतापूर्ण देश की विविधता को बचाइए। मैं समान नागरिक संहिता (यूनीफॉर्म सिविल कोड) के खिलाफ हूं। समान नागरिक संहिता में किसी को भी नहीं लाया जा सकता है।”
स्वामी ने कहा कि जब मुसलमान यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड को स्वीकार कर सकते हैं तो यूनीफॉर्म सिविल कोड में क्या दिक्कत है, जिसका उद्देश्य उस निजी कानून को स्थानांतरित करना हो जिसे शास्त्रों और देश के प्रमुख धार्मिक समुदायों के आधार पर हर नागरिक के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, “मैं जब कानून मंत्री था तब सैयद सहाबुद्दीन ने कहा था कि यूनीफॉर्म सिविल कोड शरिया के खिलाफ है। तब मैने उनसे यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड को अपनाने और शरिया को छोड़ने को कहा। जब मैने पूछा कि आप यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर ही सिर्फ शरिया को क्यों याद रखते हैं? तब इस पर उन्होंने कहा था कि मुद्दे को भटकाइए मत।”
इसके तुरंत बाद ओवैसी ने एनआईए द्वारा साध्वी प्रत्रा को क्लीन चिट दिए जाने के मुद्दे पर जिक्र करते हुए कहा कि आप बताइए कि यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड अल्पसंख्यकों के साथ कैसे भेदभाव किया जाता है। ओवैसी ने कहा कि मुंबई ब्लास्ट के दौरान एक महिला को सिर्फ इसलिए आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई क्योंकि हथियारों से भरकर एक वैन जहां से आई थी वो उससे संबंधित थी। अब एनआईए ने उन साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दे दी है जिनकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल ब्लास्ट में किया गया था। कहां है यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड? इसका पालन हुआ यहां?
स्वामी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि यह अलग मसला है कि कहां पर कोड का पालन हुआ और कहां पर नहीं लेकिन लेकिन आपने यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड को स्वीकार किया है। हर किसी ने स्वीकार किया है कि एक हिंदू जज किसी मुस्लिम को सजा सुना सकता है और एक मुस्लिम जज किसी हिंदू को।
मदरसों के मार्डनाइजेशन पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा, “शिक्षा का अधिकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होता। क्योंकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29 और 30 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार की गारंटी देता है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूल जाने वाले सिर्फ तीन फीसदी मुस्लिम बच्चे ही मदरसों में पढ़ाई करते हैं।”
बीफ विवाद पर ओवैसी ने कहा कि आप महाराष्ट्र में बीफ पर प्रतिबंध लगा रहे हैं लेकिन गोवा में नहीं। क्या यही है सबका साथ सबका विकास? उन्होंने कहा कि बीफ पर प्रतिबंध लगाने से गरीब मुसलमानों का जीवन प्रभावित होता है। ओवैसी ने कहा, “आपने 1.5 करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा किया था, लेकिन आप ऐसा नहीं कर पाए, आप तो 1.5 लाख नौकरियां भी नहीं दे पाए।”
इसका जवाब देते हुए स्वामी ने कहा, “अगर आप कहते हो कि आप भारत में हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं, लेकिन जब आप कहते हो कि आप मुस्लिम हो, तो मैं कहूंगा कि मुसलमान हर जगह हैं। दुनिया के सभी मुसलमान यूनीफॉर्म सिविल कोड को स्वीकार करते हैं, लेकिन उसे आप यहां स्वीकार नहीं करते हैं। आप कहते हो कि किसी स्थान पर बीफ प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन ठीक उसी समय आप यह भी कहते हो कि आपको संविधान पर भरोसा है। संविधान में यह लिखा है कि गौहत्या प्रतिबंधित है।”
इस पर ओवैसी ने कहा कि गौहत्या पर प्रतिबंध की बात संविधान में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में कही गई है और राज्य इसको बाध्यकारी नहीं कर सकता।
दादरी में हुई घटना पर स्वामी ने कहा कानून व्यवस्था राज्य का मसला है और इसलिए केंद्र की भाजपा नीत सरकार को 50 साल के मुस्लिम व्यक्ति की हत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। स्वामी ने कहा कि दादरी की घटना उत्तर प्रदेश में हुई जहां पर सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष सरकार है, लेकिन इल्जाम हम पर लगा। दोषी को सजा देने के लिए मुलायम सिंह यादव को कोई नहीं रोक रहा है, जबकि वो भाजपा के नेता हैं। यह मेरी सरकार का काम नहीं है। कानून व्यवस्था केंद्र नहीं राज्य का मसला है।
