सुगम्य भारत अभियान से विकलांगों को सुगमता देने की तैयारी
नई दिल्ली: देश के 26 मिलियन विकलांगों को विकास की आम धारा में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार बेहद शानदार योजना लाने जा रही है। इस योजना के तहत समूचे देश के तमाम राज्यों

नई दिल्ली: देश के 26 मिलियन विकलांगों को विकास की आम धारा में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार बेहद शानदार योजना लाने जा रही है। इस योजना के तहत समूचे देश के तमाम राज्यों और शहरों से संबद्ध सरकारी भवनों और सड़क पर सरपट दौड़ने वाले सार्वजनिक परिवहनों और तमाम वेवबसाइटों सहित संचार क्षेत्र में इस तरह से परिवर्तन किए जाएंगे ताकि अशक्त एवं विकलांग जन भी इसे आसानी से अपने उपयोग में ले सके। केंद्र ने अपनी इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए शुरुआती तौर पर कुछ शहरों को चिन्हित किया है, जहां से इस योजना की पहल की जाएगी।
किस विभाग की है मुहिम?
आपको बता दें कि सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय के विकलांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा सुगम्य भारत अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इस अभियान के पहले चरण को जुलाई 2016 से पहले पहले पूरा किया जाना है। विभाग के संयुक्त सचिव मुकेश जैन बताते हैं कि सुगम्य भारत अभियान का उद्देश्य ऐसी बुनियादी संरचना, सार्वजनिक परिवहन और संचार तकनीक का विकास करना है जिससे किसी भी प्रकार विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति को देश की सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक मुख्यधारा में लाया जा सके।
कैम्पेन के है तीन मुख्य वर्टिकल-
कैम्पेन का सबसे मुख्य उद्देश्य है समूचे भारत को सुगम्य अर्थात एक्सेसेबल बनाना। कैम्पेन में तीन प्रमुख वर्टीकल को टारगेट किया जाएगा। पहला बिल्ट एन्वायरमेंट अर्थात बुनियादी ढांचा। दूसरा सार्वजनिक परिवहन और तीसरा है सूचना और संचार तकनीक। इन तीनों क्षेत्रों में सुधार के बाद भारत को सुगम्य बनाया जा सकता है जिसमें किसी भी प्रकार की विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति सहज रूप से अपना जीवन जी सकता है।
केंद्र की इस योजना में शामिल होंगे कौन-कौन से शहर?
बड़े शहर-
लखनऊ, कानपुर, बैंगलोर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, भोपाल, कोयंबटूर, इंदौर, जयपुर, वडोदरा, सूरत, नागपुर, पटना, विशाखापट्टन, रायपुर, गुड़गांव, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी।
छोटे शहर-
वाराणसी, पोर्ट ब्लेयर, ईटानगर, दमन, पणजी, शिमला, रांची, झांसी, नासिक, गांधीनगर, कावारत्ती, इंफाल, शिलांग, आईजोल, कोहिमा, पुदुचेरी, गंगटोक अगरतल्ला, देहरादून, सिलवासा, लुधियाना और फरीदाबाद।
क्या है अभियान का उद्देश्य?
इस योजना के तहत केंद्र सरकार चाहती है कि तमाम सरकारी भवनों, सड़कों, सड़क परिवहन की सुविधाओं, स्कूल परिसरों के भीतर एवं बाहर की सुविधाओं के साथ साथ अस्पताल और घरों में भी निशक्त जनों के लिहाज से माहौल तैयार किया जाए ताकि वो खुद को भी विकास की धारा में खड़ा पाएं और खुद को किसी से कमजोर न आंक पाएं।
कौन-कौन हैं स्टेक होल्डर?
सुगम्य भारत अभियान महज एक तबके पर केंद्रीत अभियान न होकर समूचे समाज के हित में बनाया गया अभियान है। इसे सफल बनाने के लिए सरकार, कॉर्पोरेट दुनिया, अर्कीटेक्ट, संचार विशेषज्ञों, इंजीनियरों सहित सभी नागरिक इसके स्टेकहोल्डर माने गए हैं। इसलिए इसके शुरुआती चरण में इन स्टेकहोल्डर्स में जागरुकता बढ़ाने के लिए मुंबई में इसकी कार्यशाला भी आयोजित हो चुकी है। उसी दौरान सुगम्य भारत अभियान का स्ट्रेटेजी पेपर भी जारी किया गया था।
विकलांग जनों को क्या फायदा?
हालांकि मेट्रो शहरों में निशक्त एवं विकलांग जनों को कुछ बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन इस योजना का उद्देश्य यह है कि देशभर के कोनों कोनों में रह रहे विकलांग लोगों को बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों में वो तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं जो उनके भीतर अधिकारों से वंचित रह जाने की भावना का संचार न होने दे।
इंटरनेट दुनिया से भी विकलांगो को जोड़ने की पहल-
विकलांग भी इंटरनेट की दुनिया से वाकिफ हो जाएं इसलिए सरकार चाहती है कि वो कुछ वेबसाइट्स पर ऐसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं जो नेत्रहीनों के लिए भी काम की हों और वो भी उनकी फायदा उठा सकें। अगर कोई नेत्रहीन व्यक्ति जनरल नॉलेज या देश दुनिया के समाचारों से दो चार होना चाहता है तो उसे भी ऑडियो माध्यम से वो तमाम जानकारियां पता चल जाएं।