नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के नाबालिग दोषी को फिर रिमांड होम भेजने की दिल्ली महिला आयोग की याचिका ख़ारिज कर दी। सुप्रिम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि, "नाबालिग दोषी दोबारा रिमांड होम नहीं भेजा जाएगा क्योंकि दोषी को 3 साल से अधिक रिमांड होम में नहीं रख सकते। कोर्ट ने ये भी कहा कि सज़ा का मक़सद सुधार करना होता है और उसे फिर रिमांड होम में भेजना दोषी के मौलिक अधिकारों का हनन होगा।"
सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि, 'दोषी को सुधरने में 10-15 साल लगेंगे। नाबालिग दोषी को 3 साल से अधिक नहीं रख सकते है।'
दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों दोषी की रिहाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा था कि, ऐसा कदम उठाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी आदेश के खिलाफ दिल्ली महिला आयोग ने एसएलपी दाखिल की थी।
3 साल बाद निर्भया गैंगरेप के नाबालिग आरोपी को रविवार को रिहा कर दिया गया। अभी तक वो सुधारगृह में था। हालांकि वह अभी कुछ दिनों के लिए दिल्ली के एक NGO के संरक्षण में रहेगा। आरोपी की रिहाई के बाद निर्भया के माता पिता ने राजपथ पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोग नाबालिग आरोपी के लिए कड़ी सज़ा की मांग कर रहे थे।
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