नई दिल्ली: हरियाणा पंचायत चुनाव पर सुप्रिम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि, 'पंचायत चुनाव में सिर्फ साक्षर यानि पढ़े-लिखे उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं।' कोर्ट ने कहा कि, हरियाणा में पढ़े-लिखे नेता होने चाहिए। सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि, दलित और महिला उम्मीदवार 8वीं क्लास पास हों। साथ ही, सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 8वीं पास होना ज़रूरी है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार के नए नियमों के मुताबिक जनरल के लिए दसवीं पास, दलित और महिला के लिए आठवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा बिजली बिल का बकाया न होने और किसी केस में दोषी करार न होने के साथ में घर में टॉयलेट होने की शर्त रखी गई है। सरकार के नए एक्ट के तहत चुनाव प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी, लेकिन पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रदेश के कुछ सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। जहां कोर्ट में कई दिनों तक मामले की सुनवाई चली और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थी। कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था जिस पर आज फैसला सुनाया गया।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा था कि वो बताए कि नए नियमों के मुताबिक कितने लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। राज्य में कितने टॉयलेट हैं। साथ ही स्कूलों की जानकारी भी मांगी थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में बताया कि नए नियमों के मुताबिक 43 फीसदी लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। साथ ही कोर्ट को बताया गया कि राज्य के 84 फीसदी घरों में टॉयलेट हैं, जबकि 20 हजार स्कूल हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी से पूछा कि देश में कितने सांसद पढ़े-लिखे नहीं हैं। अटॉर्नी ने बताया कि चार सांसद जिसपर कोर्ट ने कहा कि अगर देखा जाए तो सहज प्रक्रिया में भी पढ़े-लिखे लोग ही चुनाव लड़कर आ रहे हैं।
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