नई दिल्ली: पुलिस को भेजे नोटिस में 14 वर्षीय दलित लड़की की पहचान कथित तौर पर उजागर करने पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। स्वाति ने रेप पीड़िता के नाम छुपाने पर सवाल उठाए, रेप पीड़ित को अपनी पहचान क्यों छिपानी चाहिए? क्या ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक रेपिस्ट खुद को छिपाए? क्या पीड़ित को इस बात से शर्मिंदा होना चाहिए की वो यातनाओं का शिकार हुई है? स्वाति मालीवाल का ये बयान एक बार फिर विवाद को जन्म दे सकता है। दरअसल निर्भया केस के दौरान भी रेप पीड़िता का नाम उजागर होना चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर बहस छिड़ चुकी है।बलात्कार पीडि़त किशोरी को तेजाब पीने को मजबूर किया गया था और उसकी तीन दिन पहले मौत हो गई थी।
इस मामले में बुराड़ी थाने के प्रभारी को महिला आयोग के नोटिस में लड़की का नाम उजागर करने पर स्वाति पर मामला दर्ज किया गया। थाना प्रभारी की शिकायत पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई। स्वाति ने बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर पुलिस की कड़ी आलोचना की थी।
पीडि़त का कथित रूप से अपहरण करके उसका बलात्कार किया गया था और उसे तेजाब पीने के लिए विवश किया गया था। लड़की ने एक महीने तक मौत से लड़ने के बाद रविवार को दम तोड़ दिया था। पीडि़ता का सबसे पहले दिसंबर में यौन उत्पीडन किया गया। पहले मामले में जमानत पर रिहा आरोपी शिवशंकर ने मई में फिर से किशोरी का कथित रूप से अपहरण करके उसे यातनाएं दीं और उसका बलात्कार किया। पीडि़ता के माता पिता अस्पताल में सफाई कर्मी हैं।
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