नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की मुसीबतें बढ़ गई हैं। उनके एनजीओ 'सबरंग ट्रस्ट' का विदेशी चंदा नियमन कानून (FCRA) लाइसेंस गुरुवार को गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया। तीस्ता के एनजीओ पर यह कार्रवाई कथित तौर पर एफसीआरए के उल्लंघन को लेकर हुई है। गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, "गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सबरंग ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द करने का निर्णय सभी मामलों की जांच करने के बाद लिया गया है।"
सरकार ने इससे पहले सीतलवाड़ द्वारा संचालित इस ट्रस्ट का विदेशी योगदान नियमन कानून (एफसीआरए) का लाइसेंस 'निलंबित' किया था। सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका के खिलाफ मुखर रहे हैं।
एफसीआरए कानून भारत में पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों को विदेश से मिलने वाले पैसे को नियंत्रित करता है। सूत्र ने बताया, "सबरंग ट्रस्ट को विदेश से मिलने वाले पैसे पर रोक नौ माह पहले सितंबर 2015 में ही लगा दी गई थी। उस वक्त सामने आया था कि ट्रस्ट ने एफसीआरए कानून का उल्लंघन किया है।" गृह मंत्रालय ने अप्रैल 2015 से ही सबरंग सहित कई गैर सरकारी संगठनों के बारे में विस्तृत जांच शुरू कर दी थी।
गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, "सबरंग ट्रस्ट सहित कुछ एनजीओ, खासकर जो तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल थे, विदेश से पैसा जिस काम के लिए मिलता था उसे उस मद में नहीं खर्च कर कथित रूप से दूसरे काम में खर्च करते थे।"
एफसीआरए वो कानून है जिसके तहत भारतीय संस्थाएं विदेशों से आर्थिक सहायता नियम क़ानून के तहत लेती हैं। पिछले साल एफ़सीआरए के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गृह मंत्रालय ने सबरंग ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन को 10 सितम्बर 2015 से छह महीने के लिए निलंबित कर दिया था और एनजीओ से 180 दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था।
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