नई दिल्ली: भारतीय सेना के पास केवल 15-20 दिनों तक युद्ध लडऩे का ही गोला बारूद है। इतना ही नहीं करीब तीस सालों से बन रहा स्वेदशी जेट लड़ाकू विमान तेजस अब भी युद्ध के लिए तैयार नहीं है। गोला बारूद में यह कमी देश के करीब 12 लाख थल सैनिकों की आपातकालीन तैयारी पर बुरा असर डालती है।
ऐसा ने सीएजी ओर से शुक्रवार को संसद मेंं पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक थल सेना को युद्ध के हालात में करीब 40 दिनों के वॉर-रिर्जव की जरूरत है लेकिन सेना के पास सिर्फ 20 दिनों का ही गोला बारूद है।
इसी कमी के चलते सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और ट्रेनिंग पर खासा असर पड़ रहा है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड(ओएफबी) की कार्यशैली पर उठाए सवाल उठाते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय ही सेना के लिए पर्याप्त गोला बारूद के लिए जिम्मेदार है, जबकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड इस गोला बारूद का स्त्रोत केंद्र है और सेना को सप्लाई करने के लिए जिम्मेदार होता है।
सीएजी केें मुताबिक करीब सात हजार करोड़ रुपए का गोला बारूद खराब गुणवत्ता या किन्ही दूसरे कारणों से बेकार पड़ा है।
ओएफबी की ओर से गोला बारूद की आपूर्ति ना कर पाने के चलते रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए गोला बारूद आयात करने की योजना बनाई थी लेकिन उसकी प्रक्रिया भी बेहद धीमी साबित हुई और सेना को मात्र 20 प्रतिशत ही प्राप्त हुई।
सीएजी की ये रिपोर्ट 2009 से 2013 के बीच किए गए ऑडिट के आधार पर तैयार की गई है, लेकिन खास बात ये है कि 2011-13 मेंं रक्षा सचिव के पद पर तैनात रहे शशिकांत शर्मा ही इन दिनोंं सीएजी हैं। गौरतलब है मौजूदा विदेश राज्यमंत्री और तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भी सेना के तोपखाने में गोला बारूद की कमी का मामला उठाया था।
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